BRICS Summit के दौरान कई अहम मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच खींचतान देखने को मिली, लेकिन आखिरकार भारत साझा घोषणा पत्र जारी कराने में सफल रहा। शनिवार को 18वें BRICS Summit के बाद 45 पन्नों का New Delhi Declaration जारी किया गया, जिसमें आतंकवाद, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों ने अपना रुख स्पष्ट किया।
इस घोषणा पत्र की सबसे अहम बात जम्मू-कश्मीर से जुड़ी है। इसमें 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई है। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। BRICS देशों ने आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाना देने और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने की बात भी दोहराई है।
घोषणा पत्र को लेकर क्यों बनी थी असमंजस की स्थिति?
BRICS में किसी भी बड़े फैसले के लिए सभी सदस्य देशों की सहमति जरूरी होती है। ऐसे में पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर देशों के अलग-अलग रुख ने साझा घोषणा पत्र को लेकर संशय पैदा कर दिया था।
खासकर ईरान पर हुए हमले के संदर्भ में अमेरिका के सीधे उल्लेख को लेकर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं था। इसी वजह से घोषणा पत्र की भाषा पर काफी लंबी बातचीत चली।
भारतीय अधिकारियों ने सहमति बनाने के लिए देर रात तक बातचीत की। जानकारी के मुताबिक 11 सितंबर की देर शाम तक घोषणा पत्र के करीब 90 फीसदी हिस्से पर सहमति बन चुकी थी। लेकिन पश्चिम एशिया से जुड़े हिस्से की भाषा पर चर्चा जारी रही।
देर रात तक चली बातचीत
सहमति बनाने की कोशिश शनिवार तड़के तक चलती रही। भारतीय अधिकारियों ने करीब 2:45 बजे रात तक बातचीत जारी रखी। रूस और चीन समेत दूसरे BRICS सदस्य देशों के बीच हुई बातचीत के बाद मुद्दों पर सहमति बनाने में मदद मिली। इसके बाद सभी सदस्य देशों की सहमति से घोषणा पत्र को अंतिम रूप दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को Summit के पहले सत्र के बाद घोषणा पत्र पर सहमति बनने की जानकारी दी।
आतंकवाद पर BRICS का दो टूक संदेश
आतंकवाद को लेकर घोषणा पत्र में BRICS देशों ने एक बार फिर सख्त रुख दिखाया है। 22 अप्रैल 2025 के जम्मू-कश्मीर आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराने और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की प्रतिबद्धता दोहराई गई है। इस मामले में इस साल का रुख पिछले साल जारी Rio de Janeiro Declaration के अनुरूप बताया गया है।
पश्चिम एशिया के हालात पर चिंता
घोषणा पत्र में पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव पर भी चिंता जताई गई है। BRICS देशों ने संबंधित पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। साथ ही युद्ध को रोकने, परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे को कम करने और विवादों का समाधान बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से निकालने पर जोर दिया गया है। बढ़ते global tensions के बीच परमाणु जोखिम को लेकर जताई गई चिंता भी घोषणा पत्र के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल है।
Trade restrictions पर भी निशाना
BRICS देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े मुद्दे पर भी अपना रुख स्पष्ट किया है। घोषणा पत्र में एकतरफा tariff और trade restrictions की आलोचना की गई है। यानी व्यापार के मामले में किसी एक देश की तरफ से लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को लेकर BRICS देशों ने चिंता जाहिर की है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह घोषणा?
पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सदस्य देशों के बीच मतभेद के बावजूद साझा घोषणा पत्र जारी होना भारत की diplomacy के लिहाज से अहम माना जा रहा है। नई दिल्ली घोषणा पत्र में आतंकवाद से लेकर युद्ध, परमाणु जोखिम और global trade तक कई ऐसे मुद्दे शामिल हैं, जिनका असर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक माहौल पर देखने को मिल सकता है।


