Begusarai News : बिहार में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। भागलपुर जिले में दो अलग-अलग जगहों पर तटबंधटूटने और कटाव की घटना सामने आई है, जबकि राज्य के 15 जिलों में 46.88 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। हालांकि कई नदियों के जलस्तर में कमी दर्ज की जा रही है, लेकिन गंगा, कोसी, गंडक समेत कई नदियां अब भी अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
आपदा प्रबंधन विभाग (DMD) के शुक्रवार को जारी बुलेटिन के मुताबिक, 15 जिलों के 88 प्रखंडों की 561 ग्राम पंचायतों की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं।
भागलपुर में दो जगह तटबंध टूटने से बढ़ी चिंता
भागलपुर में बाढ़ का असर सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली स्थिति में पहुंच गया है। नौगछिया के रंगरा चौक प्रखंड के बनिया गांव में पुरानी रेलवे लाइन के तटबंध का करीब 15 मीटर हिस्सा कोसी के बाढ़ के पानी के दबाव में ढह गया।
तटबंध टूटने के बाद पानी आसपास के इलाकों की ओर तेजी से बढ़ने लगा। इससे साधोपुर, मसुदनपुर, बैसी, भवानीपुर और बनिया के लोगों में चिंता बढ़ गई है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पानी के दबाव को देखते हुए आगे के नुकसान को रोकने की कोशिश की जा रही है।
वहीं, नौगछिया के गोपालपुर में ब्रह्मोत्तर तटबंध में करीब 10 मीटर का कटाव हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार देर रात आंधी और बारिश के बाद यह हिस्सा टूट गया। स्थानीय लोगों और प्रशासन कीमदद से क्षतिग्रस्त हिस्से को संभालने तथा कटाव को आगे बढ़ने से रोकने का काम किया जा रहा है।
बताया गया है कि इस तटबंध पर पहले से ही दबाव था और करीब चार दिन पहले यहां रिसाव भी देखा गया था। अब करीब 10 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद गोपालपुर की बड़ी आबादी को लेकर प्रशासनकी चिंता बढ़ गई है।
गंगा समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
भागलपुर के सुल्तानगंज में शुक्रवार सुबह छह बजे गंगा का जलस्तर 36.62 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 2.12 मीटर ऊपर है। हालांकि यहां जलस्तर में कमी आने की जानकारी दी गई है।
बुलेटिन के अनुसार, गंडक नदी डुमरिया घाट, कोसी बलतरा और कुर्सेला, जबकि बूढ़ी गंडक खगड़िया में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गंगा भी दीघा, गांधी घाट, हथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में खतरे के निशान के ऊपर है।
इसके अलावा पुनपुन नदी श्रीपालपुर, बागमती बेनीबाद तथा घाघरा नदी दरौली और गंगपुर सिसवन मेंखतरे के निशान से ऊपर बह रही हैित नहीं है। पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, कटिहार, पूर्णिया और बक्सर समेत कई जिलों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। खास तौर पर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जलजमाव और बाढ़ का असर अभी भी बड़ी परेश।
15 जिलों में 46.88 लाख से अधिक लोग प्रभावित
बाढ़ का असर सिर्फ भागलपुर तक सीमित नहीं है। पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, कटिहार, पूर्णियाऔर बक्सर समेत कई जिलों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। खास तौर पर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जलजमाव और बाढ़ का असर अभी भी बड़ी परेशानी बना हुआ है।
बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार, सितंबर में अब तक राज्य में 90.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गईहै, जो सामान्य से करीब 20 प्रतिशत अधिक है। बिहार और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिशको मौजूदा बाढ़ की स्थिति का प्रमुख कारण बताया गया है।
राहत शिविर और सामाने के लिए विभिन्न जिलों में राहत एवं बचाव कार्य जारी है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, प्रभावितुदायिक रसोई चल रही
सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए विभिन्न जिलों में राहत एवं बचाव कार्य जारी है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, प्रभावित इलाकों में 1,194 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं।
इसके अलावा 15 राहत शिविर भी चल रहे हैं, जहां 11,255 बाढ़ पीड़ितों के लिए रहने, भोजन, चिकित्सा और दूसरी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
फिलहाल कई नदियों के जलस्तर में कमी आने से कुछ राहत के संकेत जरूर हैं, लेकिन खतरे के निशान से ऊपर बह रही नदियों और भागलपुर में तटबंध टूटने की घटनाओं के कारण बाढ़ प्रभावित इलाकों में सतर्कताबरती जा रही है। प्रशासन का फोकस प्रभावित आबादी तक राहत पहुंचाने और तटबंधों पर बढ़ते दबावको नियंत्रित करने पर चिंता बढ़ी। 15 जिलों के 46.88 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित, राहत है।


