“नहर, नदी और जलस्रोत बचेंगे तभी मानवता बचेगी। जल का बहाव ही जीवन का बहाव है।” इसी संदेश के साथ जयमंगला गढ़ स्थित नहर घाट पर काबर नहर नवजीवन अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रसिद्ध लेखक एवं काबर नेचर क्लब के प्रमुख महेश भारती ने की।
बैठक में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षक नितेश रंजन ने काबर-बगरस नहर की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने नहर की उड़ाही (गाद निकासी), दोनों किनारों पर मजबूत बांध निर्माण तथा व्यापक वृक्षारोपण की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि नहर के पुनर्जीवन से क्षेत्र की जल व्यवस्था और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती मिलेगी।
काबर टाल किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक वल्लभ बादशाह ने कहा कि काबर क्षेत्र को टकराव की राजनीति से निकालकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों की जमीन से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद के माध्यम से होना चाहिए। साथ ही किसानों, मछुआरों और मजदूरों के हितों को ध्यान में रखते हुए काबर क्षेत्र के समग्र विकास की योजना बनाई जानी चाहिए। उन्होंने काबर-बगरस नहर को अतिक्रमण मुक्त करने, गाद की सफाई कराने तथा पूरे नहर क्षेत्र की नियमित सफाई सुनिश्चित करने की मांग की।
अध्यक्षीय संबोधन में महेश भारती ने नहर के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि काबर-बगरस नहर का निर्माण वर्ष 1951 से 1956 के बीच लगभग 15 लाख रुपये की लागत से किया गया था। करीब साढ़े आठ किलोमीटर लंबी और 11 फीट गहरी यह नहर कभी क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नहर उपेक्षा, अतिक्रमण और अव्यवस्था का शिकार हो गई है। कई स्थानों पर बाड़ लगाकर जलनिकासी को बाधित कर दिया गया है, जिससे इसका प्राकृतिक जलप्रवाह प्रभावित हुआ है। नहर में सतत जलप्रवाह बनाए रखने के लिए इसके व्यापक पुनरुद्धार की आवश्यकता है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि काबर-बगरस नहर की नियमित उड़ाही और सफाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही नहर में निरंतर जलप्रवाह बनाए रखने तथा जलस्तर संतुलित रखने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं। सफाई से निकली मिट्टी का उपयोग नहर के दोनों किनारों के बांधों को मजबूत करने में किया जाए तथा उन पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कराया जाए।
बैठक में अजय पाठक, आर्यन राज, धर्मेंद्र यादव, सरबू सदा, संजय सहनी सहित कई स्थानीय लोग और अभियान से जुड़े कार्यकर्ता उपस्थित थे। बैठक में नहर के संरक्षण और पुनर्जीवन को क्षेत्र के पर्यावरण, कृषि और आजीविका से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए जनसहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।


