Begusarai News : बेगूसराय के 9 साल का साहिल कुमार ढाई साल से लापता है। वह 16 अक्टूबर 2023 को दोस्तों के साथ खेत में खेलने निकला था। उसके तीन दोस्त घर लौट आए, लेकिन साहिल वापस नहीं आया। परिवार ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई, तलाश होती रही, लेकिन ढाई साल बाद भी पुलिस उसके बारे में कोई ठोस सुराग नहीं जुटा सकी। अब इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
वीरपुर थाना कांड संख्या 189/23 की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति रमेश चंद्र मालवीय की खंडपीठ ने पुलिस की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जतायी। कोर्ट ने साफ कहा कि लापता बच्चों के मामलों में समय पर और संवेदनशील तरीके से कार्रवाई नहीं करने वाले पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
तीन दोस्त लौटे, साहिल का आज तक पता नहीं
जानकारी के मुताबिक, प्रवीण कुमार ने 16 अक्टूबर 2023 को वीरपुर थाने में शिकायत दर्ज करायी थी। उनका नौ वर्षीय भगिना साहिल कुमार अपने दोस्तों मनखुश, अभिलाष और रमण के साथ खेत में खेलने गया था।
शाम को तीनों बच्चे अपने घर लौट आये, लेकिन साहिल नहीं लौटा। परिजनों ने आसपास तलाश की। रिश्तेदारों और परिचितों से पूछताछ की गयी, लेकिन साहिल का कोई पता नहीं चला। मामला पुलिस तक पहुंचा और प्राथमिकी दर्ज हुई। इसके बाद भी उसकी बरामदगी नहीं हो सकी। इधर, ढाई साल बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने जांच की गति और पुलिस की संवेदनशीलता पर सवाल उठाये।
चार पुलिस अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मामले की शुरुआती जांच में लापरवाही बरतने वाले चार पुलिस अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है।
जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है, उनमें प्रथम जांच अधिकारी अनिल कुमार मिश्रा, द्वितीय जांच अधिकारी शिल्पी कुमारी, तत्कालीन थानाध्यक्ष संजीव कुमार और तत्कालीन सदर डीएसपी-2, बेगूसराय भास्कर रंजन शामिल हैं।
अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जिन अधिकारियों के सामने संवेदनशील मामलों में रिपोर्ट आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, उन्हें महत्वपूर्ण फील्ड पोस्टिंग देना कितना उचित है।
सिर्फ साहिल नहीं, अब बिहार के हर लापता बच्चे का हिसाब होगा
साहिल मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूरे बिहार में लंबित बाल गुमशुदगी के मामलों को भी अपने दायरे में ले लिया है। अदालत ने DGP को राज्य के सभी थानों में लंबित लापता बच्चों के मामलों का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
DGP को दो सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के माध्यम से सारणीबद्ध चार्ट दाखिल करना होगा। इसमें यह बताना होगा कि बच्चा कब लापता हुआ, पुलिस को इसकी सूचना कब मिली और सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कौन-कौन से कदम उठाये। इस आदेश से अब उन मामलों की भी समीक्षा होगी, जिनमें बच्चे लंबे समय से लापता हैं और जांच पुलिस की फाइलों में अटकी हुई है।
SIT को तलाश करने का निर्देश
कोर्ट ने साहिल समेत लापता बच्चों की बरामदगी के लिए गठित SIT को भी तेजी से कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। बेगूसराय के डीएसपी (विशेष अपराध) के नेतृत्व में गठित टीम को लापता बच्चों की तलाश में दिन-रात जुटने को कहा गया है। अदालत का संदेश साफ है लापता बच्चे का मामला सामान्य गुमशुदगी की तरह नहीं लिया जा सकता। शुरुआती समय में पुलिस की कार्रवाई ही बच्चे की बरामदगी में निर्णायक साबित हो सकती है।
12 साल से ईशू और रानी का भी इंतजार
बेगूसराय में बच्चों के लापता होने के पुराने मामले पुलिस की कार्यशैली पर पहले से सवाल खड़े करते रहे हैं। मार्च 2014 में लोहिया नगर से नौ वर्षीय नीलोत्पल रंजन उर्फ ईशू लापता हुआ था। वर्षों बाद भी उसका पता नहीं चल सका है। इसी दौरान बनवारीपुर की रानी के लापता होने का मामला भी सामने आया था।
ईशू के परिजनों ने बच्चे के बेचे जाने की आशंका भी जतायी थी। वहीं वर्ष 2014 में हेमरा के पीयूष के अपहरण का मामला भी सामने आया था। अपहरण के बाद कथित तौर पर 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी गयी और बाद में पीयूष का शव जिनेदपुर में मिला था। इन घटनाओं ने जिले में बच्चों की सुरक्षा और गुमशुदगी के मामलों की पुलिस जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े किये हैं।
30 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की है। इस दिन DGP की ओर से दाखिल शपथ पत्र और SIT की प्रगति रिपोर्ट पर सुनवाई होगी। अब नजर इस बात पर है कि ढाई साल से लापता साहिल तक पुलिस कब पहुंचती है और राज्यभर में वर्षों से लंबित लापता बच्चों के मामलों में पुलिस की कार्रवाई का हाईकोर्ट के सामने क्या जवाब आता है।


