Barauni Municipal Council CCTV Controversy : बेगूसराय के बरौनी नगर परिषद में सीसीटीवी कैमरों की खरीद को लेकर उठे सवालों पर जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। आपको बता दें कि THE BEGUSARAI में मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। टीम को पूरे मामले की जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
दरअसल, बरौनी नगर परिषद के वार्ड संख्या-25 निवासी मो. सलीम ने 21 सितंबर को जिलाधिकारी को आवेदन देकर सीसीटीवी कैमरों की खरीद में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। शिकायत में कहा गया था कि कैमरों और दूसरे उपकरणों की खरीद बाजार कीमत से अधिक दर पर की गई और सरकारी राशि का अधिक भुगतान किया गया।
शिकायत और मामले को लेकर प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने 23 सितंबर को जांच का आदेश जारी किया। इसके लिए तीन अधिकारियों की टीम बनाई गई है। जांच कमेटी में बंदोबस्त पदाधिकारी नुरूल ऐन, तेघड़ा के अनुमंडल पदाधिकारी नीरज सिन्हा और तेघड़ा के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के कार्यपालक अभियंता अभिशांत राज को शामिल किया गया है।
खरीद से लेकर मौके पर लगे कैमरों तक की होगी जांच
जांच टीम सीसीटीवी खरीद से जुड़े कई बिंदुओं की पड़ताल करेगी। इसमें कैमरों और उपकरणों के लिए स्वीकृत राशि और किए गए भुगतान का मिलान किया जाएगा। साथ ही कैमरों के मॉडल, संख्या, गुणवत्ता और बाजार कीमत की भी जांच होगी।
इसके अलावा टेंडर या कोटेशन की प्रक्रिया और सरकारी खरीद के नियमों का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी। संबंधित एजेंसी के बिल, वाउचर, वर्क ऑर्डर और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच होगी। टीम मौके पर जाकर यह भी देखेगी कि नगर परिषद क्षेत्र में कितने कैमरे लगाए गए हैं और लगाए गए कैमरे तथा उपकरण रिकॉर्ड के मुताबिक हैं या नहीं।
गड़बड़ी मिली तो होगी कार्रवाई
जांच में अगर तय दर या बाजार मूल्य से अधिक भुगतान किए जाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों या संबंधित एजेंसी की भूमिका तय की जाएगी। इसके बाद अधिक भुगतान की गई राशि की वसूली और नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
जिलाधिकारी ने जांच टीम को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। जांच रिपोर्ट की एक प्रति शिकायतकर्ता को भी उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है। अब इस मामले में जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सीसीटीवी खरीद में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और सरकारी राशि के भुगतान में कोई अनियमितता हुई है या नहीं।

