Death Threat Giriraj Singh : केंद्रीय वस्त्र मंत्री एवं बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह को एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिलने के बाद करीब 2 साल पुराना नगर थाना कांड संख्या 537/24 चर्चा में आ गया है। सितंबर 2024 में गिरिराज सिंह को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी मिलने के बाद उनके सांसद प्रतिनिधि एवं वरीय अधिवक्ता अमरेन्द्र कुमार अमर के लिखित आवेदन पर नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उस समय अमरेन्द्र अमर को पाकिस्तान के एक नंबर से व्हाट्सऐप कॉल आने और कॉल के दौरान गिरिराज सिंह तथा उन्हें अंजाम भुगतने की धमकी दिए जाने की बात सामने आई थी।
अमरेन्द्र अमर का आरोप है कि मामले की पुलिस जांच गंभीरता से नहीं की गई। उनके अनुसार, पुलिस ने बिना पर्याप्त अनुसंधान किए प्रतिवेदन संख्या 937/2025 दिनांक 31 दिसंबर 2025 को मामले को सूत्रहीन बताते हुए समर्पित कर दिया। उनका कहना है कि इतने संवेदनशील मामले में पुलिस ने न तो सूचक का बयान लेना जरूरी समझा और न ही महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए।
अधिवक्ता अमरेन्द्र कुमार अमर ने कहा कि केंद्रीय मंत्री को जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर मामले में पुलिस को तकनीकी और अन्य सभी पहलुओं से जांच करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ऐसे मामलों में तेजी से सक्रिय हो जाती है, जहां उसे कोई लाभ दिखाई देता है, लेकिन केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से जुड़े धमकी के मामले में सतही अनुसंधान कर दिया गया।
2024 की घटना में आया था पाकिस्तान के नंबर से कॉल
सितंबर 2024 में अमरेन्द्र कुमार अमर ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया था कि उनके मोबाइल पर पाकिस्तान के +92 कोड वाले नंबर से व्हाट्सऐप कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने पहले उनकी लोकेशन पूछी और इसके बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह तथा अमरेन्द्र अमर को धमकी दी थी। मामले में अमरेंद्र अमर ने केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने और सुरक्षा की मांग भी की थी। पुलिस ने उस समय कॉल के स्रोत और इस्तेमाल की गई पहचान की जांच की बात कही थी।
फिर धमकी भरा पत्र मिलने से बढ़ी चिंता
अब सितंबर 2026 में गिरिराज सिंह को नई दिल्ली स्थित उनके मंत्रालय के पते पर डाक के माध्यम से धमकी भरा गुमनाम पत्र मिलने के बाद सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, तीन सितंबर को भेजे गए पत्र में अंग्रेजी में उन्हें जल्द ही ‘हार्डकोर आतंकियों’ द्वारा मारे जाने की धमकी दी गई। पत्र में दो मोबाइल नंबर भी दर्ज थे। मामले की सूचना बेगूसराय पुलिस को मिलने के बाद नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है और पुलिस पत्र के स्रोत, मोबाइल नंबरों तथा धमकी के पीछे की मंशा की जांच कर रही है।
कर्नाटक कनेक्शन की भी जांच
ताजा मामले में प्राथमिकी के आधार पर पुलिस कर्नाटक के कोलार जिले से जुड़े एक व्यक्ति और दो मोबाइल नंबरों समेत अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि धमकी भरा पत्र वास्तव में किसने भेजा और पत्र में दर्ज मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
दो साल पुराने मामले की जांच पर उठे सवाल
ताजा धमकी के बाद 2024 में दर्ज नगर थाना कांड संख्या 537/24 को लेकर भी बहस तेज हो गई है। अमरेन्द्र अमर का कहना है कि यदि उस समय दर्ज मामले में धमकी के स्रोत और आरोपितों तक पहुंचने के लिए गंभीरता से जांच की गई होती तो आज पुराने केस की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े नहीं होते।


