Begusarai News : गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के दावों और सरकारी बजट को ठिकाने लगाने के खेल पर अब पटना उच्च न्यायालय की पैनी नजर है। बेगूसराय नगर निगम क्षेत्र में बुडको और उसकी दो सहयोगी निर्माण कंपनियों द्वारा सीवरेज सिस्टम प्लांट परियोजना में किए गए कथित 244 करोड़ रुपये के महाघोटाले को लेकर दायर लोकहित याचिका पर उच्च न्यायालय में बड़ी सुनवाई हुई।
प्रधान न्यायाधीश संगम कुमार साहू एवं न्यायाधीश राजीव रंजन की संयुक्त पीठ ने वर्चुअल मोड में इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई की। अदालत ने याचिकाकर्ता को मामले से जुड़े अन्य गुप्त साक्ष्यों और संलिप्त चेहरों को बेनकाब करने के लिए पूरक हलफनामा (सप्लीमेंट्री) दाखिल करने हेतु तीन सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 2 जुलाई 2026 को तय की गई है।
बिना काम पूरा हुए ही निकाल लिए 200 करोड़ रुपये
बेगूसराय के भाजपा नेता सह वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेन्द्र कुमार अमर द्वारा दायर लोकहित याचिका (PIL संख्या- 7429/26) में चौंकाने वाले आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि
“पिछले 17 वर्षों से चल रही इस योजना का बजट शुरुआती 68 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 230.06 करोड़ (अब करीब 244 करोड़) रुपये कर दिया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि धरातल पर काम पूरी तरह अधूरा होने के बावजूद कागजों पर इसे पूर्ण दिखाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसका उद्घाटन तक करा दिया गया। इस घोटाले में बिना काम पूरा हुए ही करोड़ों रुपए की अवैध निकासी कर ली गई।
अधिवक्ता अमरेन्द्र कुमार अमर ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि वे जल्द ही एक सप्लीमेंट्री आवेदन के जरिए इस महाघोटाले में पर्दे के पीछे शामिल अन्य रसूखदार लोगों के नाम, पुख्ता साक्ष्य और वित्तीय हेराफेरी का पूरा ब्योरा पटना उच्च न्यायालय के समक्ष समर्पित करेंगे।
अब नई संयुक्त पीठ करेगी मामले की सुनवाई
न्यायिक हलकों से आ रही खबर के मुताबिक, आज की सुनवाई वर्तमान प्रधान न्यायाधीश संगम कुमार साहू के कार्यकाल की अंतिम सुनवाई रही, क्योंकि आज उनका अवकाश ग्रहण करने से पूर्व अंतिम कार्य दिवस था। अदालत ने मामले को अगली तिथि पर स्थानांतरित कर दिया है। अब आगामी 2 जुलाई को इस संवेदनशील मामले की सुनवाई नवनियुक्त प्रधान न्यायाधीश मिनाक्षी मदन राय तथा न्यायाधीश राजीव रंजन की नवनिठित संयुक्त पीठ में की जाएगी।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी के 124 करोड़ के एक और फ्लॉप शो की होगी एंट्री
इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब याचिकाकर्ता ने बेगूसराय शहर की एक और बदहाल योजना का पर्दाफाश किया। अमर ने बताया कि बेगूसराय नगर में 124 करोड़ रुपये की लागत वाली जलापूर्ति योजना का काम भी इसी घोटाले में घिरी कंपनी ‘केबेडिया कंस्ट्रक्शन’ को दिया गया था। यह जलापूर्ति योजना पूरी तरह से असफल (फ्लॉप) साबित हो चुकी है और जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है।
पूर्व में बुडको द्वारा लापरवाही के आरोप में जापान की तोशिबा वाटर सॉल्यूशन और गुजरात की केबेडिया कंस्ट्रक्शन को प्रतिबंधित कर जुर्माना लगाने की बात स्वीकारी जा चुकी है। याचिकाकर्ता के अनुसार, अगली सुनवाई में सीवरेज घोटाले के साथ-साथ इस 124 करोड़ की असफल जलापूर्ति योजना के दस्तावेजी सबूतों को भी सप्लीमेंट्री के साथ कोर्ट के पटल पर रखा जाएगा, ताकि बेगूसराय की जनता के पैसे की लूट करने वालों पर कानून का शिकंजा पूरी तरह कसा जा सके।


