Begusarai News : जिला प्रशासन ने नए शैक्षणिक सत्र (2026-27) में निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण को रोकने के लिए अब तक का सबसे सख्त आदेश जारी किया है। जिलाधिकारी श्रीकांत शास्त्री ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर न केवल लाखों का जुर्माना लगेगा, बल्कि उनकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
DM के आदेश की मुख्य बातें
- पुनः नामांकन शुल्क पर रोक : अगली कक्षा में जाने वाले छात्रों से री-एडमिशन फीस या कैपिटेशन शुल्क लेना पूरी तरह प्रतिबंधित और दंडनीय है।
- फीस वृद्धि की सीमा : कोई भी स्कूल एक साल में 7% से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकता।
- खरीददारी की आजादी : अभिभावक अपनी पसंद की किसी भी दुकान से किताबें, ड्रेस और स्टेशनरी खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। स्कूल किसी खास दुकान का नाम नहीं थोप सकते।
- यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं : स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे कम से कम 3 साल तक अपने ड्रेस कोड (यूनिफॉर्म) में कोई बदलाव नहीं करेंगे।
डीएम ने सभी निजी स्कूलों को 15 अप्रैल 2026 तक अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर क्लास के हिसाब से किताबों की सूची, ड्रेस की जानकारी और फीस का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने का आदेश दिया है। नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
- पहली बार उल्लंघन : न्यूनतम 1 लाख रुपये का जुर्माना।
- दूसरी बार उल्लंघन : 2 लाख रुपये का जुर्माना।
- निरंतर अवहेलना : स्कूल की प्रस्वीकृति (Recognition) रद्द करने की प्रक्रिया।
कड़ी निगरानी के निर्देश
सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को अपने क्षेत्र में नियमित जांच करने और प्रतिदिन की रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को सौंपने का जिम्मा दिया गया है। साथ ही, गरीब बच्चों के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर नामांकन सुनिश्चित नहीं करने वाले स्कूलों पर भी गाज गिरेगी।
यदि कोई स्कूल आपको किसी खास दुकान से सामान खरीदने या दोबारा नामांकन शुल्क देने के लिए मजबूर करता है, तो आप इसकी शिकायत जिला शिक्षा कार्यालय में कर सकते हैं।


