Begusarai News : बेगूसराय के अनुमंडलीय अस्पताल, मंझौल में सड़क दुर्घटना में घायल मरीज के पैर में कार्टून लगाए जाने के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में अस्पताल में पैर को स्थिर रखने के लिए गत्ते का इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि हुई है। इसे आपात स्थिति में किया गया प्रयास माना गया, लेकिन जांच में स्पष्ट किया गया कि गत्ता मानक चिकित्सीय प्रक्रिया का स्वीकार्य विकल्प नहीं है।
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो का स्वास्थ्य विभाग ने संज्ञान लिया था। इसके बाद 6 अगस्त को जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, बेगूसराय ने अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचकर पूरे मामले की स्थल जांच की।जांच के दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक, अस्पताल प्रबंधक और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से घटना के संबंध में जानकारी ली गई।
15 जुलाई को सड़क हादसे में घायल हुए थे कृष्ण कुमार
जांच में सामने आया कि 15 जुलाई को सड़क दुर्घटना में घायल कृष्ण कुमार को अनुमंडलीय अस्पताल, मंझौल लाया गया था। अस्पताल में उनका प्राथमिक उपचार किया गया और आवश्यक जांच के लिए एक्स-रे कराने की सलाह दी गई। अस्पताल में रात के समय एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें सदर अस्पताल, बेगूसराय रेफर कर दिया गया।
जांच के दौरान बताया गया कि उस समय अस्पताल में Splint उपलब्ध नहीं था। आपात स्थिति में घायल के पैर को स्थिर रखने के उद्देश्य से उपलब्ध कार्टून का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, जांच रिपोर्ट में इसे मानक चिकित्सा प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना गया है।
अस्पताल प्रबंधन को व्यवस्था सुधारने के निर्देश
जिला प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को आवश्यक चिकित्सीय सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने और भविष्य में इस तरह की स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को मानक के अनुरूप चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त
मामले में कार्रवाई करते हुए रेफरल अस्पताल, मंझौल में प्रतिनियुक्त चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिनव प्रियदर्शी की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। उन्हें उनके मूल पदस्थापन अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रामपुर बसवन, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मटिहानी में योगदान करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, कर्तव्य में लापरवाही के संबंध में उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। जांच प्रतिवेदन को आगे की कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना को भेज दिया गया है।


