Barauni Municipal Council CCTV Purchase Controversy : बेगूसराय के बरौनी नगर परिषद में CCTV कैमरों की खरीद और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर उठे सवालों के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। नगर परिषद में करीब 3.47 करोड़ रुपये की लागत से CCTV कैमरे लगाने के लिए जारी किए गए दो टेंडरों को लेकर GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर कई सवाल उठाए गए हैं।
मामले को लेकर मुख्य पार्षद की ओर से यह कहा गया है कि टेंडर की राशि सिर्फ कैमरों की कीमत नहीं है, बल्कि इसमें पोल, केबल, UPS, सर्वर रूम और मेंटेनेंस समेत अन्य व्यवस्थाएं भी शामिल हैं। वहीं, उपलब्ध टेंडर दस्तावेजों में प्रति यूनिट कीमत और अन्य सामान के स्पष्ट विवरण को लेकर सवाल सामने आए हैं। अब जिला प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पूरी परियोजना में निर्धारित नियमों और प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।
दो टेंडरों में 286 CCTV कैमरों की खरीद
जानकारी के अनुसार, बरौनी नगर परिषद की ओर से CCTV कैमरों से संबंधित दो अलग-अलग टेंडर जारी किए गए। पहला टेंडर 1 अगस्त 2025 को 229 कैमरों के लिए निकाला गया, जिसकी राशि 2,78,45,415 रुपये बताई गई। इसके बाद 22 जून 2026 को 57 कैमरों के लिए जारी हुआ, जिसकी राशि 69,33,195 रुपये बताई गई है। दोनों टेंडरों की राशि को मिलाने पर कुल लागत 3,47,78,610 रुपये होती है। इस तरह दोनों टेंडरों में कुल 286 कैमरों की खरीद का प्रावधान बताया गया है।
प्रति यूनिट कीमत को लेकर उठे सवाल ?
विवाद का प्रमुख बिंदु टेंडर से जुड़े दस्तावेजों में दर्ज 1,21,635 रुपये की प्रति यूनिट कीमत है। THE BEGUSARAI की रिपोर्ट में इस राशि की तुलना बाजार में उपलब्ध CCTV कैमरों की कीमतों से करते हुए सवाल उठाया गया। हालांकि, नगर परिषद के मुख्य पार्षद संजीव कुमार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उक्त राशि को केवल एक कैमरे की कीमत के तौर पर देखना सही नहीं है। उनके अनुसार परियोजना में कैमरों के साथ पोल, केबल, UPS, दो सर्वर रूम के निर्माण और दो वर्ष के मेंटेनेंस जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं।
GeM दस्तावेजों में किन बिंदुओं पर सवाल उठे?
पोल, केबल और UPS का स्पष्ट विवरण नहीं : THE BEGUSARAI की रिपोर्ट में बताया गया कि उपलब्ध दस्तावेजों में पोल, केबल या UPS की अलग-अलग लागत का स्पष्ट विवरण नहीं है। दस्तावेज में सीधे Per Unit Price दर्ज हैं।
ऑनलाइन टेंडर, लेकिन भुगतान मोड Offline : दस्तावेजों में ऑनलाइन खरीद प्रक्रिया के बावजूद भुगतान का माध्यम ‘Offline’ दर्ज होने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, केवल भुगतान माध्यम ‘Offline’ दर्ज होने से किसी वित्तीय अनियमितता या गबन की पुष्टि नहीं होती। इसकी वैधानिकता और प्रक्रिया की जांच संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
18 सितंबर को जिला प्रशासन ने शुरू की जांच
लगातार उठ रहे सवालों के बीच 18 सितंबर को समाहरणालय, बेगूसराय के जिला जनसंपर्क कार्यालय की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार नगर परिषद बरौनी से इस मामले में रिपोर्ट मांगी गई थी। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसकी निष्पक्ष जांच कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच में किन सवालों के जवाब मिलने हैं?
- 3.47 करोड़ रुपये की कुल राशि में कैमरों के अलावा कौन-कौन से कार्य और उपकरण शामिल थे?
- प्रत्येक कैमरे और अन्य उपकरण की वास्तविक लागत कितनी थी?
- पोल, केबल, UPS और सर्वर रूम की लागत का अलग-अलग विवरण क्या है?
- कितने कैमरे वास्तव में खरीदे और लगाए गए?
- खरीदे गए उपकरण वर्तमान में किस स्थिति में हैं?
- भुगतान किस प्रक्रिया के तहत किया गया?
- GeM पर दर्ज विवरणों में सामने आई विसंगतियों का कारण क्या है?
- टेंडर और भुगतान प्रक्रिया में नगर परिषद के स्तर पर सभी निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं?
जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
बरौनी नगर परिषद की CCTV परियोजना का उद्देश्य शहर में निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना और लोगों की सुरक्षा में मदद करना बताया गया है। लेकिन करोड़ों रुपये की खरीद से जुड़े दस्तावेजों और प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद अब पूरा मामला जिला प्रशासन की जांच के दायरे में है।

