बेगूसराय: अनुमंडल मुख्यालय मंझौल की पचमहला रोड एक बार फिर चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले 25 वर्षों में इस सड़क के निर्माण और मरम्मत पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन आज भी सड़क की स्थिति बदहाल बनी हुई है। हालात ऐसे हैं कि नाले का गंदा पानी सड़क पर बह रहा है और राहगीरों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है।
यह सड़क मंझौल पंचायत-2 और मंझौल पंचायत-3 को अलग करती है। साथ ही यह मार्ग जयमंगलागढ़, काबर ताल, गढ़पुरा, हसनपुर और एसएच-55 जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी जोड़ता है। ऐसे में यह सड़क हजारों लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 25 वर्षों में इस सड़क की सात बार पीसीसी ढलाई की जा चुकी है। कभी विधायक निधि, कभी सांसद निधि, तो कभी पंचायत और जिला परिषद की योजनाओं के माध्यम से सड़क का निर्माण कराया गया, लेकिन हर बार कुछ वर्षों के भीतर ही सड़क टूट गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि हर तीसरे या चौथे साल सड़क की मरम्मत के नाम पर सरकारी राशि खर्च की जाती रही, लेकिन आज तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
स्थानीय निवासी अरविंद कुमार ने बताया कि सड़क पर बह रहे नाले के गंदे पानी के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क पर बने गड्ढों की वजह से अब तक एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, कुछ दिन पहले एक सेवानिवृत्त शिक्षिका भी सड़क पर जमा पानी में गिरकर घायल हो गई थीं। स्थानीय लोगों ने उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया था।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सड़क जनप्रतिनिधियों के लिए केवल एक परियोजना बनकर रह गई है। विधायक निधि, सांसद निधि, पंचायत योजना और जिला परिषद के माध्यम से बार-बार सड़क का निर्माण तो कराया गया, लेकिन इसकी गुणवत्ता पर कभी ध्यान नहीं दिया गया।
ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क निर्माण की पूरी जांच कराने और स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मंझौल की पचमहला रोड की तस्वीर कब बदलेगी?


