Begusarai News : बिहार में शिक्षा के नाम पर घोषणाएं तो बड़ी-बड़ी होती हैं, लेकिन धरातल पर उनकी हकीकत कितनी डरावनी हो सकती है, इसका जीता-जागता उदाहरण बेगूसराय का बड़ी बलिया डिग्री कॉलेज है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जिस महत्वाकांक्षी योजना ने क्षेत्र के लाखों युवाओं को उच्च शिक्षा का सपना दिखाया था, वह आज विभागीय लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ चुकी है।
खंडहर में तब्दील होता भविष्य
आपको जानकर हैरानी होगी कॉलेज भवन बनकर तैयार हुए 1 साल बीत चुके हैं, लेकिन यहाँ शिक्षा की गूँज की जगह सन्नाटा पसरा है। बदहाली का आलम यह है कि परिसर के कमरों में किताबों के बजाय नशीले पदार्थ और खाली बोतलें बिखरी पड़ी हैं। खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो चुके हैं, मुख्य द्वार टूट गया है और शौचालय की स्थिति नारकीय बनी हुई है। बाउंड्री और गेट की मरम्मत न होने से असामाजिक तत्वों का यहां जमावड़ा लगा रहता है।
2018 की घोषणा, 2026 में भी अधूरा सपना
ज्ञात हो कि 6 जनवरी 2018 को पूर्व मुख्यमंत्री की समीक्षा यात्रा के दौरान इस कॉलेज की घोषणा की गई थी। वर्ष 2025 तक भवन निर्माण पूरा होने के बावजूद आज तक यहाँ शैक्षणिक सत्र शुरू नहीं हो सका है।
साहेबपुरकमाल विधानसभा क्षेत्र का यह एकमात्र डिग्री कॉलेज है। भवन तैयार है, पर पढ़ाई गायब है। छात्रों को मजबूरी में मिलों दूर बेगूसराय जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।- नीतीश चौधरी, युवा शक्ति छात्र नेता
बेटियां छोड़ रही हैं पढ़ाई
बलिया, डंडारी और साहेबपुर कमाल जैसे तीन महत्वपूर्ण प्रखंडों के लाखों लोग इस कॉलेज पर आश्रित हैं। स्थानीय छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि दूर जाने की मजबूरी और आर्थिक तंगी के कारण कई छात्राएं अपनी उच्च शिक्षा बीच में ही छोड़ने को मजबूर हैं। छात्र नेता पीयूष कुमार ने इसे प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
प्रशासनिक मौन और आश्वासन का खेल
हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर विषय पर जब प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं, स्थानीय विधायक सतानानंद संबुद्ध उर्फ ललन यादव ने कुछ कार्य शेष होने का पुराना राग अलापते हुए जल्द सत्र शुरू कराने का आश्वासन दिया है।


