Bihar Prepaid Meter : स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाला देश का पहला राज्य बना बिहार, जानिए- पुराने मीटर से कैसे हैं अलग..

Bihar Prepaid Meter : साल 2005 से पहले बिहार की गिनती बिजली के मामले में बेहद पिछड़े राज्यों में होती थी। दरअसल, राज्य के ज्यादातर गांवों में बिजली नहीं थी, लेकिन इसके बाद काम किया गया और बिजली पहुंचायी गयी। लेकिन ग्रामीण इलाकों में बिजली चोरी के मामले चरम पर पहुंच गये हैं। इस सरकार को भी राजस्व का नुकसान हुआ। इस पर नियंत्रण के लिए छापेमारी दल का गठन किया गया।

इसके बाद छापे पड़ने लगे, जुर्माना भी लगाया गया लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वही कहानी शुरू हो जाती थी। ऊर्जा विभाग लोगों को बरगलाकर बिजली चोरी करने और मीटरों में छेड़छाड़ से परेशान था, इसलिए इस लाइलाज बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार की ओर से प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना लाई गई। आज प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने के मामले में बिहार देश के लिए एक मिसाल बन गया है।

प्रीपेड मीटर से हुआ समस्या का निदान

बिजली चोरी, बिल भुगतान, मीटर रीडिंग और अन्य तकनीकी कमियों को रोकने के लिए बिहार के सभी घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का काम शुरू कर दिया गया। बिहार दुनिया का एकमात्र राज्य है जहां हर गांव में स्मार्ट मीटर लगाये जा रहे हैं। बिजली बिल में गड़बड़ी और बिल भुगतान की समस्या से लोगों को राहत मिली।

लोगों को खपत के अनुसार मीटर रिचार्ज कराने की सुविधा मिली। मीटर को अपनी सुविधा के अनुसार चालू और बंद करने की सुविधा से लोगों को काफी फायदा हुआ। सबसे बड़ी बात यह है कि लोग अब अपने मोबाइल से ही प्रीपेड स्मार्ट मीटर का संचालन कर पा रहे हैं।

प्रीपेड स्मार्ट वाला बिहार देश का पहला राज्य

बिहार देश का पहला और एकमात्र राज्य है जिसने प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना शुरू की है। हालाँकि शुरुआत में इसका काफी विरोध हुआ, बिल में अनियमितताओं की शिकायतें की गईं। इसके फायदे देखें जा रहे हैं। इसके बाद अब देश के अन्य राज्यों में भी प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाने पर किया जा रहा है।

सभी ने प्रीपेड मीटर की सराहना की

पटना में पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 13वीं बैठक में बिहार के स्मार्ट प्रीपेड मीटर की सराहना की गई है। बिहार सरकार की ओर से स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर एक अच्छी प्रैक्टिस के तौर पर प्रेजेंटेशन दिया गया, जिसमें सदस्य राज्यों ने पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के लिए बिहार की इस प्रैक्टिस को भी चुना। अब परिषद की अगली बैठक में इस प्रथा को अन्य राज्यों द्वारा लागू करने पर विचार किया जाएगा।