Begusarai News : बिहार में 40 साल बाद पड़ी भीषण ठंड का सीधा असर लोगों की सेहत पर दिखने लगा है। ठंड के चलते हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या तीन गुना तक बढ़ गई है। राजधानी पटना के IGIC, IGIMS और PMCH जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ है। लेकिन इस आपात स्थिति में भी इलाज से पहले पैसे की मांग ने इंसानियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बेगूसराय के रहने वाले वीरेंद्र कुमार की मां मंजू देवी को अचानक हार्ट अटैक आया। हालत गंभीर थी, इसलिए वे उन्हें इमरजेंसी में बेगूसराय से पटना के IGIC अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन यहां इलाज से पहले हर कदम पर पैसे की मांग ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी।
वीरेंद्र कुमार का कहना है- ‘मेरी मां दर्द से तड़प रही थी, लेकिन अस्पताल में बिना पैसे दिए न नंबर लगता है, न बेड मिलता है। टोकन कटाने का कोई सिस्टम समझ में नहीं आता। चारों तरफ दलाल घूमते रहते हैं। नंबर लगाने के लिए 200-300 रुपए लिए गए।’
उन्होंने बताया कि एम्बुलेंस से मरीज को उतारने और व्हीलचेयर पर रखने तक के लिए भी पैसे मांगे गए। वीरेंद्र ने आरोप लगाया की ‘एम्बुलेंस से उतारने के 200-300 रुपए, मरीज को अंदर ले जाने के लिए 500 से 1000 रुपए तक मांगे जाते हैं। 200-300 से नीचे तो बात ही नहीं करते है’
इतना ही नहीं, इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाले जरूरी सामान के लिए भी मनमानी वसूली की जा रही है। उन्होंने कहा- ‘मुंह में लगाने वाले पाइप के लिए 1500 रुपए मांगे गए, जबकि वही पाइप बाहर सिर्फ 60 रुपए में मिल जाता है। बेड चाहिए तो इधर-उधर दौड़ो और पैसे दो…’
ऐसे में बिहार के सबसे बड़े हार्ट हॉस्पिटल IGIC में इस तरह की अव्यवस्था और दलालों की सक्रियता ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि जब मरीज जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा हो, तब इलाज से पहले पैसे की शर्त कितनी जायज है?भीषण ठंड में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों के बीच अगर सरकारी अस्पतालों में भी गरीब को इस तरह लूटा जाएगा, तो आम आदमी आखिर जाए तो जाए कहां?

