Bihar News : बिहार के मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकार नेसात निश्चय-3 के तहत राज्य की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को पटना या दूसरे बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। क्योंकि इलाज की उन्नत सुविधाएं जिलों में ही उपलब्ध होंगी।
पांच साल में बदलेगा सरकारी स्वास्थ्य सिस्टम
राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद यह योजना 2025 से 2030 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। इसके तहत बिहार के 534 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्पेशलिटी हॉस्पिटल और 36 जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य है कि हर जिले में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित हो सके।
जिला अस्पताल बनेंगे सुपर स्पेशलिटी केंद्र
जिला अस्पतालों में अब सामान्य इलाज के साथ-साथ कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और एंडोक्रोनोलॉजी जैसी सुपर स्पेशलिटी सेवाएं मिलेंगी। यहां आईसीयू, नवजात शिशु देखभाल इकाई, आधुनिक जांच सुविधाएं और जटिल सर्जरी की व्यवस्था भी होगी। हार्ट, किडनी और दिमाग से जुड़ी बीमारियों का इलाज अब जिले में ही संभव होगा।
बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
हर जिला अस्पताल में डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (DEIC) की स्थापना की जाएगी। यहां शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात बीमारियों की समय पर पहचान और इलाज किया जाएगा। इससे दिव्यांगता और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकेगा।
प्रखंड स्तर तक पहुंचेगा स्पेशलिटी इलाज
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्पेशलिटी हॉस्पिटल बनने से प्रखंड स्तर पर ही फिजिशियन, डेंटल विशेषज्ञ, आयुष डॉक्टर, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और डाइटिशियन की सेवाएं मिलेंगी। इससे मध्यम स्तर की बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही हो सकेगा।
निगरानी और गुणवत्ता पर रहेगा जोर
सभी जिला अस्पतालों के DEIC को पटना स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जोड़ा जाएगा। यहां से इलाज की गुणवत्ता, संसाधनों और सेवाओं की निगरानी होगी। यह पहल बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

