Indian Railway : सीतामढ़ी-जयनगर-निर्मली 188 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना को आखिरकार हरी झंडी मिल गई है। साल 2008-9 में स्वीकृत यह परियोजना लंबे समय तक फाइलों में अटकी थी। वहीं 2019 में रेलवे बोर्ड द्वारा रोक दी गई थी। अब 29 सितंबर 2025 को इसे दोबारा डी-फ्रीज कर दिया गया है। इससे सालों से इंतजार कर रहे लोगों में उम्मीद जगी है।
डीपीआर और फाइनल सर्वे की प्रक्रिया शुरू
पूर्व मध्य रेलवे के महेंद्रुघाट, पटना कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार परियोजना के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे कराया जाएगा। वहीं उसके आधार पर डीपीआर तैयार होगी। रेलवे के मुख्य अभियंता (निर्माण) महबूब आलम द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में साफ किया गया है कि अब इस रेल लाइन को धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
फाइलों से बाहर निकली परियोजना
रेलवे ने इस परियोजना के लिए नया टेंडर भी आमंत्रित कर दिया है। जिससे यह संकेत मिलता है कि इस बार काम को गंभीरता से आगे बढ़ाया जाएगा। बिहार सरकार के ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के साथ हुई बातचीत में भी इस रेल लाइन को आगे बढ़ाने की पुष्टि की गई है।
मिथिलांचल-सीमांचल को मिलेगा सीधा लाभ
इस रेल लाइन के चालू होने से सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल समेत पूरे मिथिलांचल और सीमांचल क्षेत्र को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रियों को सुविधा होगी और कृषि, व्यापार व छोटे उद्योगों को नए बाजार तक पहुंच मिलेगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन पर भी असर पड़ने की उम्मीद है।
नेपाल सीमा तक मजबूत होगा रेल संपर्क
सुपौल जिले के ललितग्राम से वीरपुर तक प्रस्तावित 22 किलोमीटर लंबी रेल लाइन परियोजना को भी मंजूरी मिल चुकी है। इसके लिए फाइनल लोकेशन सर्वे का टेंडर जारी किया गया है। इस रेलखंड के शुरू होने से भारत-नेपाल सीमा तक आवागमन, व्यापार और पर्यटन को नई गति मिलेगी।
विकास की नई रफ्तार की उम्मीद
करीब दो दशक के लंबे इंतजार के बाद अब यह रेल परियोजना वास्तविक रूप लेने की ओर बढ़ रही है। यदि सर्वे और डीपीआर तय समय पर पूरी हो गई, तो आने वाले वर्षों में यह रेल लाइन उत्तर बिहार के विकास में अहम भूमिका निभा सकती है।

