Begusarai News : नए साल की पूर्व संध्या पर बेगूसराय के तेघड़ा में हुए कुख्यात नक्सली दयानंद मालाकार उर्फ दमन के एनकाउंटर का मामला अब राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है। बिहार विधान परिषद में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इस मुठभेड़ पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे ‘पुलिसिया हत्या’ करार दिया।
यह मुठभेड़ नहीं, हत्या थी : शशि सिंह
RJD एमएलसी शशि सिंह ने सदन में अपनी जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि दयानंद मालाकार को पकड़कर उसकी हत्या की गई है। वह कोई मुठभेड़ नहीं थी। अगर सरकार की नजर में कोई अपराधी है, तो उसके लिए देश में कानून और अदालतें हैं। मैं मंत्री महोदय से इस पर स्पष्ट जवाब चाहता हूँ।”
सरकार का जवाब
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने दो टूक कहा कि दयानंद मालाकार कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि एक खूंखार अपराधी था जिसके खिलाफ हत्या, लूट और विस्फोटक अधिनियम के 21 से अधिक मामले दर्ज थे। मंत्री ने कहा, “यह जिला पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई थी। पुलिस पर फायरिंग की गई, जिसके जवाब में हुई मुठभेड़ में वह मारा गया। अपराधियों के खिलाफ पुलिस का अभियान निरंतर जारी रहेगा।”
कौन था दयानंद मालाकार उर्फ दमन?
दयानंद मालाकार उत्तर बिहार के जिलों में खौफ का दूसरा नाम था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह प्रतिबंधित नक्सली संगठन का एरिया कमांडर था। बिहार पुलिस ने उस पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। अगर अपराधिक इतिहास की बात करें तो बेगूसराय और मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों में उस पर दो दर्जन के करीब संगीन मामले दर्ज थे। वह कई बार जेल जा चुका था, लेकिन बाहर आते ही पुनः वारदातों को अंजाम देने लगता था।
मुठभेड़ की वह शाम
पुलिस के अनुसार, नए साल की पूर्व संध्या (बुधवार शाम) को गुप्त सूचना मिली थी कि मालाकार अपने घर नानपुर गांव में छिपा हुआ है। एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने जब घेराबंदी की, तो मालाकार ने समर्पण करने के बजाय फायरिंग शुरू कर दी।
चलीं 40 राउंड गोलियां : पुलिस के मुताबिक, दोनों ओर से करीब 20-20 राउंड फायरिंग हुई। अपने ही घर को मोर्चा बनाकर लड़ रहा मालाकार इस क्रॉस फायरिंग में ढेर हो गया। मौके से हथियार भी बरामद किए गए थे।
राजनीतिक मोड़
RJD द्वारा इस एनकाउंटर को ‘सोची-समझी रणनीति’ बताने के बाद अब इस पर सियासत तेज है। जहां विपक्ष इसे मानवाधिकार और कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन बता रहा है, वहीं सरकार इसे ‘जीरो टॉलरेंस ऑन क्राइम’ की नीति के तहत एक सफल ऑपरेशन मान रही है।


