Kabar Tal : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले वर्ष बेगूसराय के काबर टाल क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया था। इस दौरे से इलाके के लोगों में उम्मीद जगी थी कि चार दशक पुरानी इस जटिल समस्या का कोई ठोस समाधान निकलेगा। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी न तो काबर टाल पक्षी विहार योजना धरातल पर उतर सकी और न ही यहां के किसानों की परेशानियां कम हो सकीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हवाई सर्वेक्षण से जमीनी सच्चाई सामने नहीं आती। मुख्यमंत्री यदि जमीनी सर्वेक्षण करते, तो उन्हें पता चलता कि काबर टाल क्षेत्र के हजारों किसान आज भी अपनी ही जमीन पर खेती करने से वंचित हैं। वर्षा जल से जलप्लावित रहने के कारण इस साल भी हजारों एकड़ में रबी की बुआई नहीं हो सकी है, जिससे किसानों के सामने गंभीर खाद्य संकट खड़ा हो गया है।
गौरतलब है कि वर्ष 1986 में बेगूसराय के तत्कालीन जिलाधिकारी ने जिला गजट के माध्यम से काबर टाल में पक्षी विहार बनाने की अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद 1989 में राज्य गजट के जरिए 15 हजार एकड़ से अधिक रैयती जमीन को अधिसूचित कर दिया गया। इस फैसले के खिलाफ किसानों ने न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
एक ओर काबर टाल पक्षी विहार जैसी महत्वाकांक्षी पर्यावरणीय योजना आज तक कागजों से बाहर नहीं आ सकी, तो दूसरी ओर क्षेत्रीय किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती चली गईं। वर्ष 2013 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने समस्या सुलझाने के बजाय काबर क्षेत्र की जमीन की रजिस्ट्री पर ही रोक लगा दी। इससे किसानों को अपनी ही जमीन की खरीद-बिक्री से वंचित होना पड़ा और उनकी परेशानी और गहरी हो गई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले 40 वर्षों से काबर टाल विकास केवल सरकारी फाइलों और मीडिया की सुर्खियों तक सीमित रह गया है। न तो पक्षी विहार का निर्माण हुआ और न ही किसानों के लिए कोई वैकल्पिक विकास योजना बनाई गई।
18 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हेलीकॉप्टर सर्वेक्षण के बाद क्षेत्र में नई उम्मीद जगी थी। इस बार चेरियां बरियारपुर और बखरी में नए विधायक भी चुने गए हैं, जो सत्ताधारी दल से हैं। बावजूद इसके, बीते एक साल में न तो प्रशासन ने कोई निर्णायक कदम उठाया और न ही बेगूसराय के सांसद व केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह अथवा क्षेत्रीय विधायकों ने इस दिशा में कोई ठोस पहल की।
किसानों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण जरूरी है, लेकिन उससे पहले उनकी आजीविका और भोजन की चिंता की जानी चाहिए। वर्षों से आंदोलनरत काबर टाल क्षेत्र के किसान आज भी सरकार और जनप्रतिनिधियों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं, कि कब उनकी समस्या का स्थायी और न्यायसंगत समाधान होगा।

