Begusarai news: बेगूसराय जिले के मंझौल प्रखंड में स्थित प्रथम श्रेणी बिहारी सिंह पशु अस्पताल आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। न इलाज की सुविधा, न भवन का रखरखाव — करीब 25 वर्षों से यह अस्पताल वीरान और जर्जर हालत में पड़ा हुआ है, जबकि कभी यह उत्तरी बेगूसराय का सबसे बड़ा और आधुनिक मवेशी अस्पताल हुआ करता था।
मंझौल–बेगूसराय पथ के किनारे खड़ा यह अस्पताल आज किसी भूत बंगले की तरह दिखाई देता है। जर्जर दीवारें, टूटती छतें और डरावना परिसर इस बात की गवाही देते हैं कि सिस्टम ने इसे पूरी तरह भुला दिया है।
गिरिराज सिंह से लेकर नीतीश कुमार तक… पर किसी की नजर नहीं
स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि जब गिरिराज सिंह बिहार सरकार में पशुपालन मंत्री थे, तब इस अस्पताल की स्थिति सुधारने के लिए आवेदन दिया गया था। लेकिन मंत्री पद से केंद्र में प्रमोशन के बाद मंझौल का यह पशु अस्पताल और पीछे छूटता चला गया।
आज हालत यह है कि चेरियाबरियारपुर के विधायक अभिषेक आनंद, बेगूसराय के सांसद गिरिराज सिंह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सभी इस सड़क से गुजरते हैं, लेकिन अस्पताल की बदहाली पर किसी की नजर नहीं जाती।
70 साल पहले की गौरवशाली कहानी
यह अस्पताल आज से करीब 70 वर्ष पहले मंझौल के राभभज्जु सिंह और डोभर सिंह द्वारा अपने पूर्वज बिहारी सिंह के नाम पर स्थापित किया गया था। इसके लिए मुख्य सड़क किनारे करोड़ों रुपये की जमीन दान में दी गई थी।
- शिलान्यास: 1955 में बिहार कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार सिंह
- उद्घाटन: 1958 में बिहार के तत्कालीन राज्यपाल और बाद में राष्ट्रपति बने डॉ. जाकिर हुसैन
- स्वीकृति: बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह द्वारा
कभी था उत्तरी बेगूसराय का सबसे बड़ा पशु अस्पताल
एक समय ऐसा था जब इस अस्पताल में
- 4 डॉक्टर,
- BHO, AKBHO, TBO,
- सैकड़ों स्टाफ तैनात रहते थे।
यहां दर्जनों उन्नत नस्ल के सांड, भैंसा, गाय-बकरी, हजारों मन भूसे का भंडार और 24 घंटे मवेशी पालकों को इलाज की सुविधा उपलब्ध थी। उत्तरी बेगूसराय के ग्रामीण इलाकों के लिए यह अस्पताल जीवनरेखा था।
आज कोई देखने वाला नहीं
आज स्थिति यह है कि:
- भवन के आधारभूत ढांचे गिर चुके हैं
- इलाज की कोई व्यवस्था नहीं
- पशुपालक मजबूर होकर निजी या दूरदराज के अस्पतालों में जाने को विवश हैं
ग्रामीणों का सवाल साफ है —
क्या जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ उद्घाटन तक सीमित है?
क्या ऐतिहासिक धरोहर और पशुपालकों की जरूरतें यूं ही अनदेखी होती रहेंगी?
यह खबर क्यों अहम है?
बेगूसराय जैसे कृषि और पशुपालन प्रधान जिले में पशु अस्पताल की ऐसी हालत नीतियों और प्राथमिकताओं पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह ऐतिहासिक संस्थान पूरी तरह खंडहर में बदल जाएगा।
ये भी पढ़ें : Begusarai : नववर्ष पर जयमंगलागढ़ व काबर झील में उमड़ा जनसैलाब, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम..

