Giriraj Singh : अपनी बेबाक बयानबाजी और ‘फायरब्रांड’ छवि के लिए देश भर में चर्चित BJP नेता गिरिराज सिंह पिछले 11 वर्षों से केंद्र सरकार में मंत्री हैं। बेगूसराय की जनता ने उन्हें दो बार सांसद चुनकर दिल्ली भेजा, इस उम्मीद में कि एक कद्दावर मंत्री का साथ जिले में औद्योगिक और शैक्षणिक क्रांति लाएगा। लेकिन जब धरातल पर उतरकर विकास के दावों की पड़ताल करते हैं, तो तस्वीर उम्मीदों से काफी जुदा नजर आती है।
विरासत का विस्तार या नया आगाज़?
आज बेगूसराय में जिन बड़े प्रोजेक्ट्स का शोर है, उनकी नींव पर गौर करें तो हकीकत कुछ और ही बयां करती है। रिफाइनरी का विस्तारीकरण हो, फर्टिलाइजर (HURL) का पुनरुद्धार, NTPC, फोर-लेन सड़क या सिमरिया का सिक्स-लेन गंगा पुल ये तमाम योजनाएं या तो दशकों पुरानी हैं या फिर पूर्व सांसद स्वर्गीय भोला सिंह के कार्यकाल की देन हैं। कुल मिलाकर कहे तो 2019 में गिरिराज सिंह के सांसद बनने के बाद बेगूसराय में कोई नई इकाई प्रतिष्ठान या संस्थान नहीं बना।
फाइलों में कैद अधूरे सपने
- दिनकर विश्वविद्यालय : राष्ट्रकवि की धरती पर एक स्वतंत्र विश्वविद्यालय का सपना आज भी कागजों पर दम तोड़ रहा है।
- हवाई अड्डा : विकास की लंबी उड़ान की बातें तो हुईं, लेकिन बेगूसराय का हवाई अड्डा आज भी नागरिक उड्डयन मंत्रालय की मंजूरी के इंतजार में है।
- वर्ल्ड क्लास स्टेशन : बड़े-बड़े दावों के बावजूद बेगूसराय रेलवे स्टेशन की तस्वीर नहीं बदली और बस स्टैंड की बदहाली किसी से छिपी नहीं है।
- कावर झील : एशिया की प्रसिद्ध मीठे पानी की यह झील आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए छटपटा रही है, लेकिन पर्यटन के नक्शे पर इसे लाने की कोई ठोस पहल नहीं दिखी।
Textile मंत्री के क्षेत्र में ‘वस्त्र उद्योग’ नदारद
विडंबना देखिए कि गिरिराज सिंह खुद देश के कपड़ा मंत्री (Textile Minister) है। लेकिन बेगूसराय में कोई बड़ा टेक्सटाइल हब या गारमेंट पार्क स्थापित नहीं हो सका। निफ्ट (NIFT) के जिस केंद्र का जिक्र होता है, वह महज एक ट्रेनिंग सेंटर बनकर रह गया है, जिससे जिले के बड़े पैमाने पर होने वाले पलायन को रोकने में कोई मदद नहीं मिली।

