Begusarai News : मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में ईरान और इजराइल के बीच गहराते युद्ध के बादलों ने बेगूसराय में भी बेचैनी बढ़ा दी है। ईरान के बनियास इलाके में हो रहे मिसाइल हमलों की गूँज भले ही यहाँ सुनाई न दे, लेकिन अपनों को खोने का डर अब घरों के भीतर तक पहुँच गया है। बेगूसराय के डुमरी गांव का 28 वर्षीय अफजल रजा इस समय ईरान में मौत और जिंदगी के बीच दुआओं के सहारे दिन काट रहा है।
धमाकों से कांपती जमीन, दहशत में मजदूर
पिछले 4 साल से ‘इनोवा कंस्ट्रक्शन’ में काम कर रहे अफजल ने वीडियो कॉल के जरिए वहाँ के खौफनाक मंजर को बयां किया। अफजल ने बताया कि शनिवार शाम 6 बजे के बाद जब सायरन गूँजा, तो पूरा इलाका सिहर उठा।
“अचानक एक तेज धमाका हुआ, जैसे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई हो। महज 6-7 किलोमीटर दूर मिसाइल गिरी थी। आसमान धुएँ से भर गया और सायरन की आवाज ने दिल की धड़कनें तेज कर दीं। उस रात कैंप का कोई भी मजदूर सो नहीं सका।”
एक कैंप, 4000 जिंदगियां और सिसकते परिजन
अफजल जिस कैंप में रह रहा है, वहाँ भारत, नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान के करीब 4000 मजदूर फंसे हुए हैं। इनमें अकेले बिहार के ही 100 से ज्यादा लोग शामिल हैं। अफजल ने घर पर अपनी माँ को ढांढस बंधाते हुए कहा— “अम्मी, डरना मत। अगर फोन न लगे तो समझना नेटवर्क बंद है। हम सब साथ हैं, अल्लाह ने चाहा तो सब ठीक होगा।”
फिलहाल, डुमरी गांव में अफजल का परिवार टीवी और मोबाइल पर नजरें गड़ाए बैठा है। हर गुजरते घंटे के साथ उनकी प्रार्थनाएं तेज होती जा रही हैं कि उनके लाल सहित वतन के सभी लोग सुरक्षित वापस लौट आएं।


