PUC Certificate : अब बिना वाहन को टेस्ट सेंटर ले जाए फिटनेस और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट बनवाने की सुविधा नहीं मिलेगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर व्हीकल नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इस बदलाव का मकसद गलत तरीके से जारी हो रहे PUC और फिटनेस सर्टिफिकेट पर रोक लगाना है।
ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक अब निजी वाहन मालिकों को भी ऑटोमेटेड टेस्ट स्टेशन (ATS) पर जाकर ही फिटनेस और पॉल्यूशन टेस्ट कराना होगा। यह ठीक वैसे ही जैसे अभी कमर्शियल वाहनों के लिए होता है। अधिकारियों का मानना है कि इससे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और केवल फिट वाहन ही सड़कों पर चल सकेंगे।
ऑटोमेटेड टेस्ट स्टेशन पर ही होगा टेस्ट
नए प्रस्ताव के तहत बिचौलियों या कागजी प्रक्रिया के जरिए फिटनेस सर्टिफिकेट लेना संभव नहीं होगा। फिलहाल देशभर में 160 से ज्यादा ऑटोमेटेड टेस्ट स्टेशन काम कर रहे हैं। खासतौर पर 15 साल से पुराने निजी वाहनों के लिए ATS पर फिटनेस टेस्ट कराना अनिवार्य होगा। ऐसे वाहनों के रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जरूरी रहेगा। इसके बाद हर पांच साल में यह प्रक्रिया दोहरानी होगी।
सर्टिफिकेट से पहले देना होगा वीडियो सबूत
नए नियमों के तहत फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने से पहले वाहन का कम से कम 10 सेकंड का जियो-टैग किया हुआ वीडियो अपलोड करना जरूरी होगा। इस वीडियो में वाहन को चारों दिशाओं से दिखाना होगा, ताकि नंबर प्लेट, चेसिस नंबर, इंजन नंबर और वाहन की स्थिति साफ नजर आए। इससे फर्जी जांच और गलत तारीख वाले अप्रूवल पर रोक लगेगी।
फेल वाहन को मिलेंगे 180 दिन
अगर कोई वाहन फिटनेस टेस्ट में फेल होता है।तो उसे ठीक कराने के लिए मालिक को 180 दिन का समय मिलेगा। तय समय में फिट घोषित न होने पर वाहन को End of Life Vehicle (ELV) माना जाएगा और Vahan डेटाबेस में दर्ज कर दिया जाएगा।
सिर्फ फीस देकर राहत नहीं मिलेगी
अधिकारियों के मुताबिक, अब सिर्फ फीस देकर फिटनेस की समय-सीमा बढ़ाने की सुविधा खत्म हो जाएगी। वाहन को तय समय में फिट कराना अनिवार्य होगा। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई ATS गलत रिपोर्ट जारी न करे।

