Kya hai CNAP : भारत में कॉलर की पहचान को लेकर एक नया दौर शुरू हो चुका है। TRAI की पहल पर CNAP (Caller Name Presentation) शुरू होने जा रहा है। यह नया सिस्टम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। इसके बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अब Truecaller जैसे लोकप्रिय ऐप की जरूरत खत्म हो जाएगी। हालांकि, सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। तो आइए जानते हैं विस्तार से…
CNAP क्या है और कैसे करता है काम?
CNAP यानी कॉलर नेम प्रेजेंटेशन एक नेटवर्क-आधारित सुविधा है। इसके तहत किसी कॉल के आने पर कॉल करने वाले का नाम सीधे मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देगा। इसके लिए न तो कोई ऐप डाउनलोड करना होगा और न ही इंटरनेट की जरूरत पड़ेगी।
यह नाम टेलीकॉम कंपनियों के पास मौजूद
मालूम हो कि KYC आधारित आधिकारिक रिकॉर्ड से लिया जाएगा। यह सिम कार्ड लेते समय दर्ज किया गया होता है। CNAP को फिलहाल 4G और 5G नेटवर्क पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। यूजर चाहें तो CLIR सेटिंग के जरिए अपना नाम दिखाने से रोक भी सकते हैं।
CNAP लाने की क्या जरूरत?
CNAP का मकसद कॉलर आईडी को ज्यादा भरोसेमंद और पारदर्शी बनाना है। इससे फर्जी नाम, गलत पहचान और अनजान कॉल से जुड़ी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है। TRAI का लक्ष्य है कि यह सुविधा 2026 की शुरुआत तक बड़े स्तर पर उपलब्ध हो जाए।
CNAP और Truecaller में मुख्य अंतर
CNAP नेटवर्क लेवल पर काम करता है। यह सिर्फ रजिस्टर्ड नाम दिखाता है। वहीं जबकि Truecaller एक फीचर-रिच ऐप है जो एडवांस कॉल मैनेजमेंट सुविधाएं देता है। एक सरकारी और आधिकारिक सिस्टम है तो दूसरा यूजर-आधारित प्लेटफॉर्म।
आपके लिए कौन बेहतर?
अगर आप बिना ऐप और ज्यादा परमिशन के सिर्फ कॉलर का असली नाम देखना चाहते हैं, तो CNAP बेहतर विकल्प है। वहीं स्पैम कॉल से बचाव और एडवांस फीचर्स के लिए Truecaller आज भी उपयोगी रहेगा। इसका चुनाव पूरी तरह आपकी जरूरत पर निर्भर करता है कि आपको क्या सुविधा चाहिए।

