Manjhaul News : मंझौल के मेहदा शाहपुर निवासी पूर्व कम्युनिस्ट नेता, लेखक और बुद्धिजीवी जनार्दन प्रसाद सिंह का 91 वर्ष की उम्र में 14 मार्च 2026 को नई दिल्ली में निधन हो गया। उनके निधन से बेगूसराय जिले के राजनीतिक और बौद्धिक जगत में शोक की लहर है।
जनार्दन प्रसाद सिंह 1962 में चेरियां बरियारपुर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के टिकट पर चुनाव लड़े थे, हालांकि वे उस चुनाव में पराजित हो गए थे। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई।
वे पटना स्थित स्कूली पुस्तकों के प्रकाशन संस्थान लक्ष्मी पुस्तकालय में कई वर्षों तक महाप्रबंधक रहे। बाद के वर्षों में वे पूर्णिया क्षेत्र में रहकर स्वाध्ययन और स्व-रोजगार के कार्यों में जुटे रहे। उन्होंने स्कूली पाठ्यक्रम की पुस्तकों के अलावा कई अन्य किताबें भी लिखीं।
जनार्दन प्रसाद सिंह बेगूसराय जिले के शुरुआती दौर के कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं और नेताओं में गिने जाते थे। आजादी के बाद 1950 से 1965 के बीच उन्होंने कामरेड ब्रह्मदेव सिंह, भी के आजाद, चंद्रशेखर सिंह, सियाराम यादव, देवकीनंदन सिंह, रामावतार सिंह, सूर्य नारायण सिंह और राजदेव ईश्वर जैसे साथियों के साथ मिलकर जिले में सीपीआई के संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
बताया जाता है कि उस दौर में दुनिया भर में युवाओं के बीच कम्युनिस्ट विचारधारा का खास प्रभाव था। समाजवाद और क्रांतिकारी सोच से प्रेरित होकर जनार्दन बाबू भी कम्युनिस्ट आंदोलन से जुड़े। कठिनाइयों, गरीबी और अभाव के बीच उन्होंने लंबे समय तक पार्टी संगठन के विस्तार के लिए काम किया।
उनके पुत्र संजीव कुमार दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी के प्राध्यापक, संपादक और लेखक हैं। जनार्दन प्रसाद सिंह के निधन पर पूर्व सांसद रामजीवन सिंह, वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक महेश भारती, जलेस के जिला सचिव राजेश कुमार, पूर्व मुखिया शारदानंद सिंह सहित कई लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। लोगों ने उन्हें विचार और सिद्धांत का धनी, ईमानदार तथा पढ़े-लिखे नेताओं की पीढ़ी का प्रतिनिधि बताया।


