Manjhaul News : बेगूसराय जिले के मंझौल अनुमंडल के झुल्ला बहियार में प्रशासन की एक विवादास्पद कार्रवाई ने स्थानीय किसानों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। शनिवार को SDO और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में जेसीबी मशीनों से करीब दो बीघे में लगी गेहूं की तैयार फसल को नष्ट कर दिया गया। पीड़ित किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना उनकी दलील सुने और बिना जमीन के कागजातों की जांच किए अलोकतांत्रिक तरीके से इस कार्रवाई को अंजाम दिया है।
आत्महत्या की ओर धकेल रहा प्रशासन
पीड़ित किसान मनटुन प्रभात, भागो सिंह, रामानुज सिंह और रामाशीष सिंह ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वे पिछले लगभग साठ वर्षों से इस जमीन पर खेती कर अपना जीविकोपार्जन कर रहे हैं। किसानों के अनुसार-
- हजारों रुपये खर्च कर फसल की बुआई की गई थी, जिसे काटने का समय नजदीक था।
- प्रशासन ने केवल एक नोटिस थमाया और बिना पक्ष सुने खड़ी फसल को रौंद दिया।
- इस कार्रवाई से किसानों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है और गहरा मानसिक सदमा पहुँचा है।
- किसानों ने इसे किसान विरोधी कृत्य बताते हुए कहा कि प्रशासन का यह रवैया उन्हें आत्महत्या की ओर धकेलने जैसा है।
सीपीआई (माले) ने साधा निशाना
घटना की सूचना मिलते ही शनिवार को सीपीआई (माले) के नेताओं की एक टीम ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और पीड़ित किसानों से मुलाकात की। माले नेताओं ने प्रशासन की इस कार्रवाई को ‘बेरहम’ और ‘कॉरपोरेट परस्त’ करार दिया।
माले नेता योगी जी, नवल किशोर, किसान सभा के चंद्रदेव वर्मा और पूर्व मुखिया शैलेन्द्र सिंह ने संयुक्त रूप से कहा कि सरकार विकास के नाम पर किसानों के जीवन के अधिकार पर हमला कर रही है। नेताओं ने आरोप लगाया कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और कानून की धज्जियाँ उड़ाने लगे, तो इसे ‘जंगलराज’ के अलावा और क्या कहा जा सकता है।
आंदोलन और कानूनी लड़ाई का ऐलान
मुक्ति नारायण सिंह सहित अन्य नेताओं ने किसानों को आश्वासन दिया कि वे इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा फसल की बर्बादी वास्तव में किसानों की मेहनत की लूट है। माले नेताओं ने किसानों को हर संभव कानूनी सहायता देने और इस मुद्दे को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।

