Kabar Tal : काबर टाल क्षेत्र में लगातार बने जलजमाव के कारण दस हजार बीघे से अधिक उपजाऊ भूमि में इस वर्ष रबी की खेती नहीं हो सकी। समय पर जलनिकासी नहीं होने से खेत परती रह गए हैं और किसान गहरी आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं।
कभी बिहार के मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह और तत्कालीन सिंचाई मंत्री रामचरित्र बाबू ने काबर टाल से बगरस तक नहर का निर्माण कर पानी को बूढ़ी गंडक नदी में प्रवाहित करने की व्यवस्था की थी। इस नहर का उद्देश्य काबर क्षेत्र से अतिरिक्त पानी की निकासी कर कृषि भूमि को बचाना था। लेकिन आज वही काबर–बगरस नहर बदहाली का शिकार हो चुकी है।
एक ओर नहर की नियमित सफाई और रखरखाव नहीं होने से यह बेकार पड़ी है, वहीं दूसरी ओर काबर में पानी भरने के लिए जयमंगलागढ़ के पास नहर पर बांध बनाकर जलप्रवाह रोकने की कोशिशें की जा रही हैं। नहर के अलग-अलग हिस्सों में मछली शिकार (माही) के लिए अस्थायी बांध बना दिए गए हैं, जिससे पानी का बहाव पूरी तरह बाधित हो गया है।
स्थिति को और गंभीर बना दिया है नहर पर बने पुलों ने। हरसाइन भुईधारा, हेमनपुर, लौछे, बागवान और बगरस के पास बने पुलों के आसपास अवशेष अवरोध के कारण नहर पाटी हुई है। कई स्थानों पर पुराने लोहे के पुल हटाकर आरसीसी पुल बना दिए गए हैं, जो पहले की तुलना में अधिक चौड़े और लंबे हैं। पुल निर्माण के दौरान बनाए गए डायवर्सन को ठेकेदारों द्वारा हटाया नहीं गया, जिससे नहर का प्राकृतिक जलप्रवाह रुक गया है।
जलनिकासी मार्ग अवरुद्ध रहने के कारण मंझौल, पहसारा, खाजहापुर, नारायण पीपर, एकंबा, परोड़ा, मणिकपुर, सकरा, रजौर, कनौसी सहित दर्जनों गांवों के बड़े कृषि क्षेत्र जलप्लावित हैं। नावकोठी, गढ़पुरा, बखरी और चेरियाबरियारपुर प्रखंड के कई पंचायतों और गांवों की कृषि आधारित आबादी इस संकट से जूझ रही है।
हजारों एकड़ भूमि में समय पर पानी नहीं निकल पाने के कारण रबी फसल की बुवाई संभव नहीं हो सकी। खेत खाली पड़े हैं और किसान असहाय नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि काबर-बगरस नहर को अतिक्रमण और अवरोध से मुक्त कर इसकी मूल जलनिकासी क्षमता बहाल की जाए, ताकि आने वाले समय में खेती और किसानों को इस संकट से उबारा जा सके।

