Begusarai News : बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग ने राज्य में औद्योगिक क्रांति और बंद पड़ी चीनी मिलों के पुनरुद्धार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार (2025-2030)’ नीति के तहत बेगूसराय सहित प्रदेश के 25 जिलों में नई चीनी मिलों की स्थापना की योजना तैयार की गई है। इस संबंध में विभाग ने बेगूसराय के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर चीनी मिल के लिए 100 एकड़ उपयुक्त भूमि चिह्नित करने और विस्तृत प्रतिवेदन भेजने का निर्देश दिया है।
जमीन और उपज का होगा सघन आकलन
जानकारी के अनुसार, चीनी मिल की स्थापना के लिए न केवल 100 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी, बल्कि मिल की व्यवहार्यता के लिए उसके आसपास 30 से 40 हजार एकड़ क्षेत्र में गन्ना उत्पादन की क्षमता का भी आकलन किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिकता उन स्थलों को दी जाएगी जहां पहले से बंद पड़ी मिलें मौजूद हैं।
- भूमि चयन : सरकारी या निजी भूमि की उपलब्धता का होगा मूल्यांकन।
- कृषि टास्क फोर्स : जमीन चिह्नित होने के बाद विशेष टास्क फोर्स मिट्टी और सिंचाई सुविधाओं की जांच करेगी।
- उच्च स्तरीय निगरानी : मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति पूरी परियोजना की मॉनिटरिंग करेगी।
जिले के किसानों को मिलेगा बड़ा सहारा
वर्तमान में बेगूसराय के गढ़पुरा, छौड़ाही, खोदावंदपुर, बखरी और नावकोठी जैसे प्रखंडों में गन्ने की खेती प्रमुखता से होती है। हालांकि, जिले में मिल न होने के कारण किसानों को अपनी उपज समस्तीपुर की हसनपुर चीनी मिल ले जानी पड़ती है या स्थानीय गुड़ भट्ठों पर कम दाम में बेचनी पड़ती है। स्थानीय मिल खुलने से परिवहन खर्च बचेगा और समय पर भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा।
रोजगार के खुलेंगे द्वार
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी मिल की स्थापना से जिले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। तकनीकी और प्रशासनिक पदों के साथ-साथ परिवहन, पैकेजिंग और सहायक उद्योगों को भी संजीवनी मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले युवाओं को अपने ही जिले में काम मिल सकेगा।
“बेगूसराय में गन्ने की खेती का रकबा संतोषजनक है। यदि यहाँ मिल खुलती है, तो किसान सह-फसली खेती के रूप में गन्ने को और बड़े पैमाने पर अपनाएंगे। यह जिले के लिए मील का पत्थर साबित होगा।” स्थानीय कृषि विशेषज्ञ


