Begusarai News : बेगूसराय नगर निगम क्षेत्र में पिछले 17 वर्षों से लटकी जल निस्तारण (सीवरेज) योजना अब एक बड़े घोटाले के आरोपों में घिर गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता व अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर ने DM श्रीकांत शास्त्री को आवेदन सौंपकर योजना में शामिल एजेंसियों और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सरकारी धन की लूट करने वाली कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने और उन पर अविलंब प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है।
2008 से शुरू हुआ लूट का सिलसिला
शिकायत के अनुसार, इस योजना की आधारशिला वर्ष 2008 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी द्वारा 64 करोड़ रुपये की लागत से रखी गई थी। आरोप है कि ‘ट्राइटेक इंडिया’ नामक कंपनी बिना काम पूरा किए करोड़ों की राशि डकार कर फरार हो गई, जिसके बाद उसे काली सूची (Blacklist) में डाल दिया गया था।
तोशिबा और केवेडिया पर गंभीर आरोप
मामला तब और पेचीदा हो गया जब वर्ष 2015-16 में राज्य की कार्यान्वयन एजेंसी बुडको (BUIDCO) के माध्यम से 237 करोड़ रुपये की लागत से दोबारा काम शुरू हुआ। इस बार ‘तोशिबा’ और ‘केवेडिया’ नामक कंपनियों को जिम्मेदारी मिली।
- तोशिबा की चालाकी : तोशिबा को तीन पंपिंग स्टेशन बनाने थे, लेकिन आरोप है कि कंपनी ने महज एक स्टेशन बनाकर और रसूख का इस्तेमाल कर कागजों पर काम ‘पूर्ण’ दिखा दिया।
- केवेडिया की लापरवाही : केवेडिया कंपनी को 90 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछानी थी, जो आज भी अधूरी है। काम पूरा करने की समय सीमा (डेडलाइन) को फरवरी 2022 से बढ़ाकर पहले मार्च 2023 और फिर अक्टूबर 2024 किया गया, लेकिन धरातल पर काम जस का तस है।
पीएम से कराया अधूरे प्रोजेक्ट का उद्घाटन
अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि नगर विकास विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से जून 2025 (पत्रांक 2275) में इस अधूरे प्रोजेक्ट को ‘पूर्ण’ घोषित कर दिया गया। इसी आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसका उद्घाटन भी करा लिया गया, जबकि सच्चाई यह है कि जुलाई 2025 से ही साइट पर काम पूरी तरह बंद पड़ा है।
बिना काम पैसे निकालना आपराधिक कृत्य
भाजपा नेता ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया है कि बिना काम किए सरकारी खजाने से राशि की निकासी करना एक गंभीर आपराधिक कृत्य है। उन्होंने जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि लोक धन की इस बंदरबांट की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी एजेंसियों व बुडको के संबंधित अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि जनता की गाढ़ी कमाई की लूट पर लगाम लग सके।
तत्कालीन डीएम के दावों पर उठे सवाल
मालूम हो कि उद्घाटन के समय तत्कालीन जिलाधिकारी तुषार सिंगला ने इस प्रोजेक्ट को जिले की बड़ी उपलब्धि बताया था। उन्होंने कहा था कि 17 MLD क्षमता वाले इस प्लांट और 95 किलोमीटर लंबी सीवरेज लाइन से शहर का गंदा पानी ट्रीट होकर गंगा में जाएगा और बचा हुआ मलगाद (Sludge) किसानों के लिए खाद का काम करेगा। डीएम ने दावा किया था कि इससे गंगा प्रदूषित नहीं होगी और यह पर्यावरण के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

