Begusarai News : बेगूसराय जिले के प्रसिद्ध काबर टाल (काबर झील) के जल में पाई जाने वाली कई मछलियों की प्रजातियां तेजी से विलुप्त हो रही हैं, जिससे इस क्षेत्र की जैव विविधता पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। काबर टाल की पहचान उसकी समृद्ध जैविक संरचना और देसी मछलियों के प्राकृतिक वास के रूप में रही है, लेकिन अंधाधुंध शिकार और संरक्षण के अभाव ने इस संतुलन को बिगाड़ दिया है।
काबर टाल की जैव विविधता में मछलियों की अहम भूमिका
काबर झील क्षेत्र की मिट्टी और जल संरचना देसी मछलियों के लिए आदर्श मानी जाती है। यहां के जल में प्लैंकटन, अतिसूक्ष्म जलीय जीव और वनस्पतियों की भरपूर उपलब्धता के कारण मछलियों को प्राकृतिक भोजन सहजता से मिल जाता है। यही वजह है कि काबर टाल लंबे समय तक मछली प्रजातियों की विविधता के लिए जाना जाता रहा है।
अंधाधुंध शिकार से संकट में मछली प्रजातियां
स्थानीय मछुआरों के अनुसार, बिना किसी वैज्ञानिक नियंत्रण और संरक्षण नीति के शिकारमाही के कारण मछलियों की कई प्रजातियां या तो पूरी तरह गायब हो चुकी हैं या विलुप्त होने के कगार पर हैं।
कभी यहां प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली फोकबा, कवई, गैंची, बामी जैसी स्थानीय नामों वाली छोटी मछलियां अब लगभग नदारद हो चुकी हैं।
काबर टाल में पाई जाने वाली प्रमुख मछलियां
काबर झील क्षेत्र में पाई जाने वाली प्रमुख मछलियों में शामिल हैं:
- रोहू
- कतला
- बुआरी
- मिरका सिंगही
- गरई
- पोठिया
- ढलवां
- ढोंगा चनदा
- खोलसा
- भालसरी
- मांगुर
- सौरी
- पटहिया टेंगरा
- चेंगा
- कुरसा
जानकारों के अनुसार, लगभग 24 प्रजातियों में से करीब आधा दर्जन मछलियां विलुप्त हो चुकी हैं, जो जैव विविधता के लिए गंभीर चेतावनी है।
हजारों मछुआरे, लेकिन संरक्षण की कोई नीति नहीं
काबर टाल में जल रहने की स्थिति में करीब दो हजार मछुआरे डेंगी नाव और जाल की मदद से मछलियों का शिकार करते हैं। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में:
- न वैज्ञानिक प्रबंधन है
- न प्रजनन काल में रोक
- न विलुप्त होती प्रजातियों के संरक्षण की व्यवस्था
चिंताजनक बात यह है कि इस पर्यावरणीय खतरे पर न तो वैज्ञानिकों का ध्यान है और न ही प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है।
काबर टाल केवल मछुआरों की आजीविका का स्रोत नहीं, बल्कि बिहार की प्रमुख आर्द्रभूमि (Wetland) और अंतरराष्ट्रीय महत्व का क्षेत्र है। मछलियों का विलुप्त होना पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के असंतुलन का संकेत है।
यदि समय रहते संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में काबर टाल की जैव विविधता को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
Report: महेश भारती

