Rajiv Nayan Jansuraj CHeriya Bariyarpur Jansuraj

चेरियाबरियारपुर में जन सुराज का बड़ा दांव: रामजीवन सिंह के पुत्र डॉ. राजीव नयन की एंट्री से बदलेगा समीकरण?

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बेगूसराय के चेरियाबरियारपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। जन सुराज पार्टी ने यहाँ बड़ा दांव खेलते हुए बिहार के वरिष्ठ समाजवादी नेता और पांच बार विधायक रह चुके रामजीवन सिंह के पुत्र डॉ. राजीव नयन को पार्टी में शामिल करा लिया है। राजनीति रणनीतिकार प्रशांत किशोर खुद बेगूसराय जिले के मंझौल स्थित रामजीवन सिंह के आवास पहुँचे और न केवल डॉ. राजीव नयन को जन सुराज में शामिल कराया, बल्कि 94 वर्षीय समाजवादी नेता से आशीर्वाद भी लिया।

रामजीवन सिंह का समाजवादी सफर और विरासत

रामजीवन सिंह बिहार के उन बड़े नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी, लोकदल, दमकिपा और जनता दल के साथ-साथ जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तक की जिम्मेदारी संभाली। वे पांच बार विधायक और दो बार सांसद भी रहे।
डॉ. राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर जैसे दिग्गज नेताओं के साथ उनका लम्बा राजनीतिक जुड़ाव रहा। साल 2009 में उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया, लेकिन अपनी राजनीतिक शुचिता और सादगी के कारण उन्हें आज भी आदर्श राजनेता के रूप में याद किया जाता है।

अब पुत्र की बारी – डॉ. राजीव नयन की एंट्री

59 वर्षीय डॉ. राजीव नयन फिलहाल महेंद्र सावित्री कॉलेज, मंझौल के प्रिंसिपल हैं। इससे पहले वे इसी कॉलेज में 27 साल तक प्रोफेसर रहे। अब उनके राजनीति में उतरने से चेरियाबरियारपुर विधानसभा का समीकरण बदल सकता है।
प्रशांत किशोर ने इस मौके पर कहा –
“रामजीवन सिंह उन गिने-चुने नेताओं में रहे हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि अगर वे राजनीति में सक्रिय रहते तो दिशा कुछ और होती। अब उन्होंने जन सुराज को आशीर्वाद दिया है और अपने पुत्र को पार्टी के कामों में शामिल होने की आज्ञा दी है। इसके लिए हम उनके आभारी हैं।”

2025 का चुनाव: जातीय समीकरण या नई राजनीति?

चेरियाबरियारपुर विधानसभा समाजवादी आंदोलन का गढ़ रहा है। यहाँ जातीय समीकरण हमेशा चुनावी नतीजों पर गहरा असर डालते आए हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या डॉ. राजीव नयन की एंट्री से नई बिसात बिछेगी या फिर परंपरागत समीकरण ही 2025 के चुनाव में निर्णायक होंगे।
अब देखना होगा कि क्या इतिहास खुद को दोहराएगा, या जन सुराज एक नई व्यवस्था और नया राजनीतिक मोड़ लेकर आएगा।

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