Barauni Refinery : भारतीय मजदूर संघ से सम्बद्ध श्रमिक विकास परिषद ने बरौनी रिफाइनरी के भीतर पिछले 1 महीने से जारी मजदूरों के प्रदर्शन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। परिषद ने इसे मजदूरों के हक की लड़ाई के बजाय राजनीतिक लाभ लेने की एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। इस संबंध में परिषद के एक शिष्टमंडल ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा और रिफाइनरी में लॉ एंड ऑर्डर (कानून-व्यवस्था) दुरुस्त करने की मांग की।
अति संवेदनशील प्लांट में आंदोलन सुरक्षा के लिए खतरा
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए परिषद के महामंत्री प्रबेन्द्र कुमार ने कहा कि रिफाइनरी के अंदर आंदोलन का मुखौटा पहनकर कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “बरौनी रिफाइनरी एक अति-ज्वलनशील पेट्रोलियम प्रतिष्ठान है। प्लांट के अंदर इस तरह के उग्र प्रदर्शन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। यदि कोई अप्रिय घटना घटती, तो पूरे रिफाइनरी को बचाना मुश्किल हो जाता।” परिषद ने इस तरह की साजिश की कड़े शब्दों में निंदा की है।
मजदूरों के शोषण पर जताई चिंता
श्रमिक विकास परिषद ने आरोप लगाया कि रिफाइनरी के विस्तारीकरण परियोजना में लगी बड़ी कंपनियां, जैसे L&T और अन्य सब-कॉन्ट्रैक्टर, श्रमिकों का भारी शोषण कर रही हैं। महामंत्री ने बताया कि कंपनियां केंद्र सरकार के निर्धारित रेट के बजाय बिहार सरकार के न्यूनतम मजदूरी दर पर भुगतान कर रही हैं, जो पूरी तरह गैर-कानूनी है। मजदूरों को पीएफ (PF), ईएसआई (ESI) और पीपीई (PPE) किट जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। 8 घंटे से अधिक काम लेने के बावजूद ओवर-टाइम का भुगतान सुनिश्चित नहीं है।
प्रोजेक्ट की बढ़ती लागत पर उठाए सवाल
परिषद ने चिंता जताई कि विस्तारीकरण परियोजना की लागत, जो शुरुआत में 13,840 करोड़ रुपये थी, अब बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यदि इसी तरह का ‘लेबर अनरेस्ट’ (मजदूर असंतोष) बना रहा और काम 24 घंटे नहीं चला, तो लागत और बढ़ेगी जिसका सीधा नुकसान स्थानीय मजदूरों को होगा। परिषद ने इस परियोजना की समयबद्ध निगरानी के लिए एक विशेष समिति बनाने की मांग की है।
केंद्रीय मंत्री ने डीएम को लिखा पत्र
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बेगूसराय के जिलाधिकारी और रिफाइनरी प्रबंधन को पत्र लिखा है। मंत्री ने निर्देश दिया है कि
- श्रमिकों की जायज समस्याओं का त्वरित निष्पादन किया जाए।
- रिफाइनरी परिसर में कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाए।
- भीड़ का हिस्सा बनकर प्रतिष्ठान को अस्थिर करने वाले असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई हो।
प्रमुख मांगें
- केंद्रीय न्यूनतम मजदूरी का तत्काल भुगतान।
- विस्तारीकरण परियोजना की उच्चस्तरीय निगरानी।
- सीएसआर (CSR) के तहत आसपास के गांवों में शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था।
- रिफाइनरी को बंद करने की किसी भी साजिश का डटकर मुकाबला।


