Begusarai Ethanol Factory : बिहार में औद्योगिक क्रांति का सपना देख रहे युवाओं और किसानों को केंद्र सरकार की नई इथेनॉल नीति से गहरा झटका लगा है। तेल कंपनियों (OMCs) द्वारा इथेनॉल खरीद के कोटे में 100 प्रतिशत से कटौती कर उसे मात्र 50 प्रतिशत कर दिए जाने से राज्य के इथेनॉल प्लांट अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। बेगूसराय स्थित एकमात्र इथेनॉल फैक्ट्री ‘न्यू वे होम्स प्राइवेट लिमिटेड’ पिछले 20 दिनों से पूरी तरह बंद है, जिससे हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
उत्पादन में कटौती और स्टोरेज की समस्या
जनवरी 2024 में बड़े उत्साह के साथ शुरू हुई इस फैक्ट्री की क्षमता 40 लाख लीटर प्रति माह उत्पादन की है। फैक्ट्री के टेक्नो कमर्शियल मैनेजर मनीष त्रिपाठी के अनुसार, प्लांट अपनी पूरी क्षमता से उत्पादन कर रहा था और तेल कंपनियां भी इसकी आपूर्ति ले रही थीं। लेकिन नई पॉलिसी के लागू होते ही कंपनियों ने खरीद आधी कर दी है।
“जब आपूर्ति आधी हो गई, तो उत्पादित इथेनॉल को रखने के लिए स्टोरेज कम पड़ गया। मजबूरन हमें उत्पादन रोकना पड़ा। अभी हम कर्मियों को बिना काम के वेतन दे रहे हैं, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती।”- मनीष त्रिपाठी, टेक्नो कमर्शियल मैनेजर
मक्का किसानों और मजदूरों पर दोहरी मार
- दैनिक मजदूर : लोड-अनलोड करने वाले मजदूरों की आय में 50 से 75 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। महीने में 20-20 दिन काम बंद रहने से इनके चूल्हे ठंडे पड़ने लगे हैं।
- पलायन का खतरा : स्थानीय मजदूरों का कहना है कि गांव के पास फैक्ट्री खुलने से घर पर रहकर सम्मानजनक कमाई की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब फिर से दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने की मजबूरी सामने खड़ी है।
- मक्का किसान : बिहार मक्का उत्पादन का गढ़ है। इथेनॉल प्लांट बंद होने से मक्के की मांग घटेगी, जिसका सीधा असर किसानों को मिलने वाले दाम पर पड़ेगा।
बिहार के अन्य प्लांट भी बंदी की कगार पर
यह समस्या केवल बेगूसराय तक सीमित नहीं है। बिहार सरकार ने इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए निवेश का भारी प्रोत्साहन दिया था, लेकिन केंद्र की इस नई खरीद नीति ने राज्य के कई अन्य जिलों में स्थित इथेनॉल यूनिट्स को भी बंदी की कगार पर ला खड़ा किया है।

