126 साल बाद बदला समीकरण, कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक?
बेगूसराय जिला में कांग्रेस बदल गई। बेगूसराय अनुमंडलीय कांग्रेस कमेटी के गठन के 126 बरसों बाद और बेगूसराय जिला गठन के 54 वर्षों बाद बेगूसराय जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष पहली बार किसी कथित पिछड़ी जाति यादव से आने वाले शिवप्रकाश गरीबदास Shivprakash Garibdas बने हैं। बिहार की आज की जातिवादी और जातीय समीकरण के राजनीतिक दौर में यह बेगूसराय जिले में कांग्रेस पार्टी का मास्टरस्ट्रोक माना जा सकता है।
36 साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस
बिहार में पिछले 36 बरसों से कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर है। बेगूसराय कभी बिहार में कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। जहां 1952, 1957 और 1962 के विधानसभा चुनावों में अधिकांश कांग्रेस विधायक ही चुने जाते रहे थे। विपक्ष के इक्के-दुक्के विधायक ही चुने गए थे।
लेकिन 1967 के चुनाव से विपक्षियों की चुनौती कांग्रेस को मिलने लगी और पार्टी लगातार संघर्ष करते हुए जिले में अपना जनाधार बनाए रखने में सफल रही।
1989-90 के बाद कांग्रेस का पतन
1989 के लोकसभा चुनाव और 1990 के विधानसभा चुनाव में जिले से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया और तब से लगातार कांग्रेस पार्टी कमजोर होती गई।
जातीय समीकरण बदलने लगे:
- दलित और मुस्लिम वोटर राजद और कम्युनिस्ट की ओर शिफ्ट हुए
- सवर्ण वोटर भाजपा की ओर चले गए
पिछड़ी जातियों के समीकरण के साथ राजद-कम्युनिस्ट गठबंधन मजबूत हुआ, जिससे कांग्रेस की स्थिति और कमजोर हो गई।
संगठन बचाने की कोशिश, लेकिन नेतृत्व एकतरफा
भाजपा का जिले में प्रभाव बढ़ने के बाद कांग्रेस राजद-कम्युनिस्ट गठबंधन से जुड़ी जरूर, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ।
इसके बावजूद:
- कई नेताओं ने पार्टी छोड़ी
- फिर भी कुछ सवर्ण और दलित नेता संगठन को बचाए रखने में लगे रहे
हालांकि, अब तक कांग्रेस के अधिकांश जिलाध्यक्ष सवर्ण समाज से ही बनते रहे।
पहली बार यादव चेहरे पर दांव
अबकी बार कांग्रेस पार्टी ने पहली बार यादव समाज से आने वाले शिवप्रकाश गरीबदास पर जिलाध्यक्ष के रूप में दांव खेला है।
हालांकि, कांग्रेस यहां भी वंशवाद से पूरी तरह उबर नहीं पाई है।
- शिवप्रकाश गरीबदास, पूर्व मंत्री और विधायक Ramdev Rai के पुत्र हैं
- रामदेव राय छह बार बछवाड़ा से विधायक रहे
- 1972 से 2015 तक लगातार कांग्रेस से चुनाव लड़ते रहे
आगे क्या होगा?
अब बेगूसराय में कांग्रेस की कमान नए सामाजिक समीकरण के साथ नए नेतृत्व के हाथ में आई है।
इसका कितना राजनीतिक फायदा मिलेगा, यह आने वाला समय तय करेगा।


