Barauni Sudha Dairy : बरौनी सुधा डेयरी पर कथित 100 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला अभी थमा भी नहीं था कि एक और गंभीर अनियमितता सामने आ गई है। इस बार डेयरी द्वारा मार्केट में उतारे गए सुधा ब्रांड के ठेकुआ उत्पाद में शुद्ध घी की जगह रिफाइंड वनस्पति तेल के उपयोग का आरोप लगा है।
जानकारी के अनुसार, सुधा डेयरी की आंतरिक व्यवस्था के तहत डेयरी उत्पादों में वनस्पति तेल के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है। इतना ही नहीं, डेयरी प्लांट परिसर में भी वनस्पति तेल के प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती है। इसके बावजूद ठेकुआ के उत्पादन में रिफाइंड तेल का उपयोग किया जाना नियमों की खुली अनदेखी माना जा रहा है।
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि ठेकुआ उत्पादन को लेकर न तो निदेशक मंडल की बैठक में कोई प्रस्ताव पारित किया गया और न ही उत्पादन शुरू करने से पहले मुख्यालय स्तर पर अनुमति ली गई। जब इस संबंध में शिकायत बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) के मुख्यालय तक पहुंची, तो वहां से कड़ा रुख अपनाया गया।
कॉम्फेड के महाप्रबंधक ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए बरौनी सुधा डेयरी के प्रबंध निदेशक से लिखित स्पष्टीकरण तलब किया है। महाप्रबंधक द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि मुख्यालय को सूचना मिली है कि बरौनी दुग्ध संघ द्वारा सुधा मल्टी ब्रांड के ठेकुआ का उत्पादन वनस्पति तेल का उपयोग कर किया जा रहा है, जबकि इसके लिए न तो कॉम्फेड की सहमति ली गई और न ही अनुमति।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कॉम्फेड के अधीन शाहाबाद दुग्ध संघ, आरा तथा रोहतास डेयरी प्रोजेक्ट, डेहरी ऑन सोन में वर्षों से ठेकुआ का उत्पादन शुद्ध घी का उपयोग कर किया जा रहा है। इसके विपरीत बरौनी डेयरी द्वारा बिना मुख्यालय की अनुमति के रिफाइंड तेल से उत्पादन कर सुधा ब्रांड के नाम से विपणन किया जाना गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है।
महाप्रबंधक ने प्रबंध निदेशक से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि ठेकुआ का उत्पादन कब शुरू किया गया, यह किसके आदेश पर हुआ, पैकेट पर बिना अनुमति कॉम्फेड का नाम क्यों अंकित किया गया तथा तिथि वार उत्पादन और बिक्री का पूरा विवरण उपलब्ध कराया जाए।

