भारत पर्यटन के मामले में भी मजबूत स्थिति में है। अपनी सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक विविधता और आध्यात्मिक परंपराओं के कारण वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थान रखता है। CRISIL Intelligence रिपोर्ट की माने तो पर्यटन संसाधनों के लिहाज से भारत को दुनिया में सातवां स्थान मिला है। यह देश की ऐतिहासिक और प्राकृतिक ताकत बताता है।
रोजगार और MSME को मिल रहा बड़ा सहारा
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 13.3 प्रतिशत से अधिक कार्यबल प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पर्यटन क्षेत्र से जुड़ी हुई है। होटल, होमस्टे, ट्रैवल एजेंट, लोकल गाइड, हस्तशिल्प, फूड स्टॉल और परिवहन सेवाओं में MSME सेक्टर की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से ज्यादा है। ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में महिलाओं और युवाओं के लिए यह क्षेत्र गैर-कृषि रोजगार का स्रोत बन चुका है।
घरेलू पर्यटन बना अर्थव्यवस्था की रीढ़
CRISIL की रिपोर्ट बताती है कि भारत में पर्यटन का सबसे मजबूत आधार घरेलू यात्राएं हैं। वर्ष 2024 में देश में करीब 296 करोड़ पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं। इनमें 99 प्रतिशत से अधिक घरेलू पर्यटक थे। वर्ष 2011 से घरेलू पर्यटन में औसतन 9.8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि देखी गई है।
GDP में योगदान अब भी सीमित
पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बावजूद आर्थिक योगदान अपेक्षाकृत कम है। वर्ष 2024 में पर्यटन का प्रत्यक्ष योगदान बढ़कर 8.18 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। लेकिन GDP में इसकी हिस्सेदारी अब भी 5 से 6 प्रतिशत के बीच बनी हुई है। यह वैश्विक औसत से काफी कम है।
वैश्विक रैंकिंग में विरोधाभास
Travel & Tourism Development Index 2024 में भारत को संसाधनों के मामले में सातवां स्थान मिला है, लेकिन सुरक्षा, स्वच्छता और नियामक माहौल जैसे संकेतकों में देश की रैंकिंग 100 से नीचे है। इसके साथ ही होटल क्षमता, कनेक्टिविटी और सेवाओं की कमी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
स्थिरता और इंफ्रास्ट्रक्चर बनी बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में ओवर-टूरिज्म और पर्यावरणीय दबाव को पर्यटन विकास की बड़ी चुनौती बताया गया है। इन कमजोरियों के चलते पर्यटकों का ठहराव, MSME की आय और दोबारा यात्रा की संभावनाएं सीमित हो रही हैं, जिससे भारत हाई-वैल्यू टूरिज्म का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा है।

