बिहार का लाल बना ISRO में वैज्ञानिक , जानिए देश में टॉप करने वाले Ashutosh Kumar के बारे में..

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न्यूज डेस्क: आपने एक कहावत तो जरूर सुनी होगी, जिंदगी में कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती… कुछ ऐसी ही कहानी है बिहार के पूर्णिया के रहने वाले आशुतोष कुमार की.. आशुतोष कुमार ने पूरे देश में बिहार और पूर्णिया का नाम रोशन किया है। आशुतोष का ISRO में एक वैज्ञानिक के तौर पर चयन किया गया है। इस पद के लिए 1 हजार प्रतिभागियों का सिलेक्शन (Selection) किया गया। जिनमें आशुतोष भी शामिल हैं। 30 सितंबर 2021 को रिजल्ट जारी किया गया था जिसमें उन्हें 22वां रैंक मिला है। आशुतोष की माने तो जॉइनिंग नवंबर तक होगी और उसके बाद विभाग उन्हे काम का निर्धारण करेगी।

अपने प्रारंभिक शिक्षा पूर्णिया से की: आशूतोष के पिता ‌विनय मोहन झा ने बताया कि आशुतोष ने मैट्रिक तक की शिक्षा पूर्णिया के थाना चौक स्थित सरस्वती विधा मंदिर से की है। उसके बाद 12 वी की शिक्षा पूर्णिया के जिला स्कूल से पूरा किया। पढ़ने के शौक ने उन्हे ओडिशा के KIIT यूनिवर्सिटी में B.Tech में एडमिशन कराया। वही अपने कालेज के पढाई का खर्च निकालने के लिए उसने छात्रों को ट्यूशन देते रहे । इसी तरह दिन रात मेहनत के बाद आशुतोष ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में फर्स्ट क्लास से पास किया और इसके बाद ISRO का एग्जाम दिया।

बेहद मध्यम वर्गीय परिवार से आते है आशुतोष: आशुतोष पूर्णिया के जिले के नगर प्रखंड अंतर्गत बनभभाग, चुनापुर गांव के रहने वाले हैं। आशुतोष मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं। आशुतोष के दादा एक किसान थे और पिता विनय मोहन झा सिविल कोर्ट पूर्णिया में वकील कार्यरत हैं। आशुतोष की एक छोटी बहन राखी कुमारी है जिन्होंने फ़िलहाल में ही BPSC का फाइनल की परीक्षा दि है। आशुतोष के गांव में शिक्षा के नाम पर सिर्फ एक ही मिडिल स्कूल है। अब इस तरह गांव के स्कूल में पढाई कर आगे बढ़ना आशुतोष के लिए काफी मुश्किल भरा था। पिता के वकील होने पर भी वह इतनी आर्थिक सुविधा नहीं दे सकते क्योंकी लॉकडाउन के कारण कोर्ट बंद हो गया और घर चलाना भी मुश्किल हो गया था। पर इस कठिन घड़ी में आशुतोष ने पढाई के साथ-साथ ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और इससे मिलने वाले पैसे से परिवार की मदद भी करने लगे। इन सब से उनकी मेहनत सिद्ध हुई और वह 22 वी रैंक लेकर ISRO में अब एक वैज्ञानिक के तौर पर चयनित किए गए है।

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