May 17, 2022

ग्राहकों के लिए खुशखबरी – सस्ता हुआ खाने का तेल, सरसों, सोयाबीन के दाम गिरे, जानिए नया रेट..

oil rate become cheaper

डेस्क : बढ़ती महंगाई के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। एक ओर जहां रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा है ऐसे में बढ़ रहे खाद्य तेलों की कीमत आम लोगों को चिंता में डाले हुए हैं। लेकिन, तिलहन अनाज की मंडियों में आवक तेज होने से एक बार फिर खाद्य तेल की कीमत घटने लगी है।

माना जा रहा है कि आने वाले समय में खाद्य तेल की कीमत काफी निचले स्तर तक जाएगा। आपको बता दे की अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में गिरावट के रुख के बावजूद तेल-तिलहन बाजार में सरसों तेल-तिलहन में तेजी देखने को मिली। जबकि, वैश्विक बाजारों में कमजोरी की वजह से पामोलीन और सोयाबीन तेल कीमतों में गिरावट आई। बाजार सूत्रों के मुताबिक मलेशिया एक्सचेंज में लगभग 3.5 फीसद की गिरावट थी। जबकि, शिकॉगो एक्सचेंज में लगभग एक फीसद की गिरावट रही।

मंडी में थोक भाव इस प्रकार रहे-

  • सरसों तिलहन – 7,550-7,600 (42%कंडीशन का भाव) रुपये।
  • मूंगफली – 6,550 – 6,645 रुपये।
  • मूंगफली तेल मिल डिलिवरी – 15,350 रुपये।
  • मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,540 – 2,730 रुपये प्रति टिन।
  • सरसों तेल – 15,250 रुपये प्रति क्विंटल।
  • सरसों पक्की – 2,410-2,485 रुपये प्रति टिन।
  • सरसों कच्ची – 2,460-2,560 रुपये प्रति टिन।
  • तिल तेल मिल डिलिवरी – 17,000-18,500 रुपये।
  • सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी- 16,200 रुपये।
  • सोयाबीन मिल डिलिवरी- 15,950 रुपये।
  • सोयाबीन तेल डीगम,- 14,750।
  • सीपीओ एक्स- 14,200 रुपये।
  • बिनौला मिल डिलिवरी- 14,850 रुपये।
  • पामोलिन आरबीडी – 15,700 रुपये
  • पामोलिन एक्स- 14,450 रुपये
  • सोयाबीन दाना – 7,525-7,575 रुपये
  • सोयाबीन लूज 7,225-7,325 रुपये।
  • मक्का खल 4,000 रुपये।

सूत्रों ने कहा है की विदेशी तेलों विशेषकर कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल के दाम काफी महंगे हैं और इसके लिवाल नहीं हैं। इन तेलों की कमी फिलहाल सरसों से पूरी हो रही है। पिछले सालों में किसानों को तिलहन का अच्छा दाम मिलने से इस बार सरसों के उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि हुई है। सरसों की खपत बढ़ रही है और मंडियों में सरसों की आवक लगभग 10 लाख बोरी की हुई। वही, आयातित तेलों के महंगा होने के कारण इसकी कमी को फिलहाल सरसों और मूंगफली के जरिये पूरा किया जा रहा है। ज्यादा दबाव सरसों पर है और पैदावार अधिक होने के कारण ज्यादातर स्थानों पर इसका रिफाइंड बनाया जा रहे है।