बिहार : सरकारी प्राइमरी स्कूलों के 1.10 करोड़ बच्चों के पास किताबें नहीं, ऐसे में बच्चे का भविष्य कैसे सुधरेगा?

primary school money

डेस्क : पौराणिक काल से लेकर अभी तक बिहार नए-नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। दुनिया के तीसरा सबसे कठिन परीक्षा माने जाने वाले UPSC में भी बिहार का जलवा रहता है। देश में सबसे ज्यादा आईएएस बिहार से ही हैं। बिहार को यूं ही विद्वानों की धरती नहीं कहा जाता है। लेकिन, बिहार अब बदल रहा है।

इतना बदल रहा है कि बिहार के सरकारी स्कूलों के 65% विद्यार्थियों के पास किताब ही नहीं है। सरकार की तरफ से न हीं विद्यार्थियों को किताब खरीदने के लिए पैसा भेजा गया है और किताब की उपलब्धता भी सब जगह नहीं हो पाई है। शराबबंदी के बावजूद बिहार के किसी भी कोने में शराब आपको उपलब्ध मिलेगा लेकिन किताब नहीं। आर्यभट्ट ने शून्य का खोज इसलिए नहीं किया होगा कि बिहार शिक्षा के क्षेत्र में शून्यता की ओर चला जाए।

2022-23 सत्र के लिए 18 अप्रैल को ही किताब छापने का आर्डर प्रकाशकों को दे दिया गया है। 2018-19 सत्र से बच्चों को सरकार की तरफ से किताब खरीदने के लिए राशि दी जाती है। पिछले तीन सत्रों से पुस्तक खरीदने के लिए सरकार द्वारा राशि दी जा रही है लेकिन यह राशि कभी भी समय पर बच्चों को नहीं दिया गया है। अगर पिछले 3 सालों के रिकॉर्ड को देखेंगे तो सत्र शुरू अप्रैल माह में होता है और राशि कभी अक्टूबर तो कभी नवंबर, दिसंबर तो कभी जनवरी में आता है। यह राशि कभी भी समय पर नहीं दिया जाता है। सरकारी विद्यालयों में ज्यादातर छात्र गरीब और मध्यम वर्ग के होते हैं।

इससे सिस्टम पर सवाल खड़ा होना लाजमी है। शिक्षा के अधिकार कानून के अंतर्गत कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को किताब खरीदने के लिए पैसे दिया जाता है जिसमें से समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत 60% केंद्र सरकार और 40% राज्य सरकार की पुस्तक मद में सहभागिता होती है। इस सत्र में बच्चों के किताब के लिए 520 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यह राशि बच्चों के खाते में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

कोरोना के कारण पिछले दो सत्र 2020-21 और 2021-22 में मात्र 20% विद्यार्थियों ने किताब लिया था। लेकिन इस वर्ष हर बच्चों तक पुस्तक उपलब्ध कराने की चुनौती प्रकाशकों के ऊपर है। प्रकाशको के अनुसार जिले के प्रमुख दुकान में तो पुस्तकें उपलब्ध है लेकिन प्रखंड और ग्रामीण इलाके के दुकान में अभी नहीं पहुंच पाई है। प्रकाशक अमित कुमार राय के मुताबिक शुरुआती रुझान से यह लगता है कि इस बार किताबों की बिक्री अच्छी खासी होगी। इस मामले पर विभागीय अधिकारी का कहना है कि जब बच्चों के खाते में पैसा चला जाएगा तब कैंप लगाकर किताब खरीदने के लिए बच्चों को जागरूक किया जाएगा।