खास बातें :
- गंगा दियारा में खुलेआम लहराए हथियार, फायरिंग का वीडियो वायरल।
- पुलिस की मौजूदगी में दी गालियां, दो नामजद आरोपियों की तलाश में छापेमारी।
- स्थानीय लोगों ने पुलिस पर लगाया माफिया को संरक्षण देने का आरोप।
Begusarai News : बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने हाल ही में हुंकार भरी थी कि मार्च 2026 तक राज्य से भू-माफियाओं का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा। सरकार के इस दावे की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि बेगूसराय से आई एक खौफनाक तस्वीर ने प्रशासन के इकबाल पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या पुलिस का खौफ खत्म हो गया है?
चकिया थाना क्षेत्र के रूपनगर गंगा दियारा इलाके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बालू माफिया न केवल खुलेआम हथियार लहरा रहे हैं, बल्कि अंधाधुंध फायरिंग भी कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे पुलिस की मौजूदगी की परवाह किए बिना गंदी-गंदी गालियां दे रहे हैं और कानून को ठेंगे पर रख रहे हैं।
वर्चस्व की जंग में सहमे किसान
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, दियारा के इस दुर्गम इलाके में बालू के अवैध खनन को लेकर आए दिन खूनी संघर्ष की स्थिति बनी रहती है। ताजा मामले में वायरल वीडियो के आधार पर यह स्पष्ट है कि अपराधियों के मन से कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से यह अवैध धंधा फल-फूल रहा है। माफियाओं के डर से क्षेत्र के किसानों ने अपने खेतों की ओर जाना बंद कर दिया है, जिससे कृषि कार्यों पर भी संकट गहरा गया है।
पुलिस की कार्रवाई और एफआईआर
वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए मुख्यालय डीएसपी निखिल कुमार ने बताया कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर लिया है। उन्होंने कहा- ‘रूपनगर निवासी सुदीन पासवान के बयान पर सिमरिया गांव के कारी सिंह उर्फ रुद्रा सिंह और रामचंद्र सिंह को नामजद किया गया है। आरोपियों के विरुद्ध बीएनएस (BNS), आर्म्स एक्ट और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।’
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठते सवाल
वीडियो में दिख रहा फुटेज यह सवाल खड़ा करता है कि क्या पुलिस का इकबाल वाकई खत्म हो गया है? अपराधियों द्वारा पुलिस के समक्ष ही गाली-गलौज करना प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है। हालांकि, डीएसपी ने आश्वासन दिया है कि माफियाओं के पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
कथनी और करनी में अंतर कब तक?
एक ओर सरकार 2026 तक माफियाओं के ‘पूरे हिसाब’ का रोडमैप तैयार कर रही है, तो दूसरी ओर धरातल पर बालू माफिया समानांतर सरकार चला रहे हैं। बेगूसराय की घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि राज्य के गृह विभाग के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि पुलिस बल की मौजूदगी में अपराधी गोलियां चला रहे हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है।

