Simaria Six-Lane Bridge : उत्तर और दक्षिण बिहार की जीवनरेखा कहे जाने वाले नवनिर्मित मोकामा-औंटा-सिमरिया सिक्स-लेन पुल की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता पर अब सवाल उठने लगे हैं। पिछले साल (22 अगस्त 2025) में बड़े तामझाम के साथ शुरू हुए इस महासेतु पर अभी से एक्सपेंशन जॉइंट्स (EXPANSION JOINT) के मेंटेनेंस का काम शुरू कर दिया गया है।
हैरानी की बात यह है कि जिस पुल को दशकों तक बिना किसी बाधा के सेवा देने के लिए डिजाइन किया गया था, वहां महज 8 महीनों के भीतर ही मरम्मत की नौबत क्यों आई?
विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में इन जॉइंट्स की गहन जांच 2 से 3 साल में एक बार होती है, लेकिन यहां उद्घाटन के चंद महीनों बाद ही निर्माण एजेंसी को कटर और मशीनों के साथ काम करना पड़ रहा है।
क्या भारी लोड बना कारण या निर्माण में लापरवाही?
इस रूट पर ओवरलोडेड ट्रकों का दबाव हमेशा से बड़ी चुनौती रहा है। हालांकि, आधुनिक ‘एक्स्ट्राडोज्ड’ केबल तकनीक से बने इस पुल को भारी दबाव झेलने के लिए ही बनाया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जॉइंट्स की फिटिंग में तकनीकी खामी रह गई थी? क्या इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी? या जल्दबाजी में उद्घाटन करने के चक्कर में फिनिशिंग के काम में कोताही बरती गई?
आपको बता दे की राजेंद्र सेतु के जर्जर होने के बाद इस सिक्स-लेन पुल से लोगों को बड़ी उम्मीदें थीं। लेकिन आए दिन लग रहे बैरिकेड्स और मेंटेनेंस के कारण ट्रैफिक की रफ्तार सुस्त पड़ रही है।
करीब 1900 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल की सेहत अगर 8 महीने में ही खराब होने लगे, तो यह इंजीनियरिंग पर बड़ा सवालिया निशान है। प्रशासन और NHAI को इस पर जवाबदेही तय करनी चाहिए।– स्थानीय राहगीर
फिलहाल, निर्माण कंपनी इसे रूटीन चेकअप बता रही है, लेकिन मौके की तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। अब देखना यह है कि विभाग इस पर क्या सफाई देता है और क्या यह मरम्मत स्थायी समाधान साबित होगी।


