Begusarai Sewerage System Plant Project : गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के उद्देश्य से बेगूसराय में पिछले 17 सालों से चल रहे सीवरेज सिस्टम प्लांट परियोजना भ्रष्टाचार और लेटलतीफी की भेंट चढ़ गया है। बेगूसराय की जनता आज भी खुले नालों और प्रदूषण से जूझ रही है, जबकि सरकारी फाइलों में करोड़ों रुपये साफ हो चुके हैं।
अब इस मामले में अधिवक्ता सह वरिष्ठ BJP नेता अमरेंद्र कुमार अमर ने पटना उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि करोड़ों रुपये डकारने के बाद भी धरातल पर काम अधूरा है और कागजों पर इसे ‘पूर्ण’ दिखाकर प्रधानमंत्री मोदी से उद्घाटन करा दिया गया है।
विधानसभा में सरकार ने मानी नाकामी
बेगूसराय के विधायक कुंदन कुमार द्वारा सदन में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने स्वीकार किया है कि 17 MLD क्षमता वाला सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनकर तैयार है, लेकिन सीवरेज नेटवर्क (पाइपलाइन) का कार्य अपूर्ण होने के कारण प्लांट को प्रदूषित जल प्राप्त नहीं हो पा रहा है। इसके साथ ही लापरवाही के लिए जापान की कम्पनी Toshiba Water Solution Pvt. Ltd. और गुजरात की कंपनी Kevadiya Construction Pvt. Ltd. को बुडको द्वारा 14.04.2025 को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इन कंपनियों पर जुर्माना लगाया गया है और इन्हें ब्लैक-लिस्ट करने की प्रक्रिया जारी है।
बजट में भारी उछाल, पर काम ढाक के तीन पात
इस परियोजना की कहानी धोखाधड़ी और वित्तीय कुप्रबंधन से भरी है, शुरुआत में 68 करोड़ की यह परियोजना अब 230.06 करोड़ रुपये की हो चुकी है। 2008 में ‘ट्रिटेक इंडिया’ नामक कंपनी पैसे लेकर काम छोड़कर भाग गई थी। इसके बाद 2015-16 में बुडको ने वर्तमान कंपनियों को काम सौंपा, जिनकी समय सीमा अक्टूबर 2024 को समाप्त हो गई, पर काम अब भी अधूरा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि अधिकारियों की मिलीभगत से अधूरे प्रोजेक्ट का 20 जून 2025 को प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा उद्घाटन करवा दिया गया, जबकि जमीन पर पाइपलाइन का जाल बिछा ही नहीं है ।
| कार्य का विवरण | आवंटित राशि (करोड़ में) |
| सीवरेज सिस्टम (98 KM ) | ₹126.39 करोड़ |
| STP निर्माण | ₹21.95 करोड़ |
| पंपिंग स्टेशन (3 नग) | ₹10.66 करोड़ |
| 15 वर्षों का रख-रखाव (O&M) | ₹57.53 करोड़ |
| कुल संशोधित लागत (Say) | ₹230.06 करोड़ |
क्या प्रशासन मौन है?
याचिका में सवाल उठाया गया है कि डीएम और नगर आयुक्त को शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई?याचिकाकर्ता का कहना है कि यह जनता के पैसे की खुली लूट है और स्थानीय रसूखदारों के दबाव में अधिकारी इस घोटाले पर पर्दा डाल रहे हैं। अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर ने अदालत से मांग की है कि इस पूरे ‘स्कैम’ की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए और जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों व नेताओं पर FIR दर्ज की जाए।


