Bihar News : बिहार के मुंगेर में उजागर हुए चर्चित रिश्वत कांड ने अब बड़ा रूप ले लिया है। शुरुआती कार्रवाई के बाद जहां एक ओर पेशकार पर शिकंजा कसता दिख रहा है, वहीं अब इस मामले की आंच बेगूसराय तक पहुंच गई है। ताजा घटनाक्रम में बेगूसराय के अंचलाधिकारी (सीओ) और डीसीएलआर भी जांच के दायरे में आ गए हैं।
यह मामला 1 अप्रैल को उस समय सामने आया, जब एक पीड़ित ने निगरानी थाना, पटना में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही निगरानी विभाग हरकत में आया और त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस प्रकरण की परतें एक-एक कर खुलने लगी हैं।
इससे पहले निगरानी टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंगेर प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में तैनात पेशकार मुकेश कुमार को 1.70 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। जानकारी के अनुसार, यह रिश्वत एक जमीन विवाद से जुड़े मामले में मांगी गई थी।
प्राथमिक जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि सरकारी जमीन से संबंधित इस मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार कर कब्जा दिलाने की साजिश रची गई थी। आरोप है कि संबंधित फाइल को प्रभावित करने और अनुकूल रिपोर्ट तैयार कराने के लिए रिश्वत की मांग की गई थी।
अब जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। बेगूसराय के अंचलाधिकारी और डीसीएलआर की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद उन्हें भी जांच के घेरे में लिया गया है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
निगरानी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर बिहार के सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, लगातार हो रही निगरानी कार्रवाई से यह संकेत भी मिल रहा है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए हुए है। इसके बावजूद ऐसे मामलों का सामने आना व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर करता है।


