Begusarai Sadar Hospital : बेगूसराय सदर अस्पताल के ICU से लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ तैनात नर्सिंग स्टाफ की कथित मनमानी के कारण एक 13 वर्षीय मासूम 3 घंटे तक दर्द से तड़पता रहा, लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने उसकी पेशाब की नली (फोली कैथेटर) बदलने से साफ मना कर दिया। अंततः थक-हारकर परिजनों को एक निजी अस्पताल के स्टाफ को पैसे देकर बुलाना पड़ा, तब जाकर बच्चे को राहत मिली।
क्या है पूरा मामला?
तेघड़ा प्रखंड के पिढ़ौली निवासी लालू पासवान का 13 वर्षीय पुत्र आशिक कुमार पिछले 20 दिनों से दिमागी बुखार (मेनिनजाइटिस) से जूझ रहा है। बेहतर इलाज की उम्मीद में परिजनों ने उसे सदर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया था। बच्चे की पेशाब की नली लीक होने के कारण पेशाब बंद हो गया, जिससे उसके शरीर में सूजन आ गई और वह दर्द से चीखने लगा।
डॉक्टर के आदेश को भी स्टाफ ने किया दरकिनार
पीड़ित पिता लालू पासवान ने आरोप लगाया कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर संजय कुमार ने खुद सिस्टर को कैथेटर बदलने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके, वहां मौजूद नर्सों ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि ‘यह हमारा काम नहीं है’ हद तो तब हो गई जब अस्पताल में कैथेटर उपलब्ध होने के बावजूद परिजनों से उसे बाहर से खरीदकर लाने को कहा गया और सुबह की दवा तक नहीं दी गई।
निजी स्टाफ ने 1500 रुपये लेकर की मदद
बच्चे की हालत बिगड़ती देख परिजनों ने एक निजी क्लिनिक के कर्मचारी से संपर्क किया। उस कर्मचारी ने आईसीयू के भीतर आकर पाइप और थैली बदली, जिसके लिए परिजनों को 1500 रुपये चुकाने पड़े। सवाल यह भी उठ रहा है कि अस्पताल के प्रतिबंधित क्षेत्र (ICU) में बाहरी व्यक्ति को प्रवेश कैसे मिला?
“यह अत्यंत गंभीर मामला है। डॉक्टर के निर्देश के बावजूद कैथेटर नहीं बदलना लापरवाही है। साथ ही, बाहरी व्यक्ति आईसीयू में कैसे दाखिल हुआ, इसकी भी जांच की जाएगी। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।”– डॉ. अखिलेश कुमार, अधीक्षक, सदर अस्पताल बेगूसराय
व्यवस्था पर उठते सवाल
- क्या सदर अस्पताल के आईसीयू स्टाफ को बुनियादी मेडिकल प्रक्रिया का ज्ञान नहीं है?
- सरकारी स्टोर में सामान होने के बावजूद मरीजों को बाहर क्यों भेजा जा रहा है?
- अस्पताल प्रशासन की नाक के नीचे निजी अस्पताल के लोग सक्रिय क्यों हैं?

