December 6, 2022

No-cost EMI कराने से पहले जान लीजिए ये बातें – वरना होगी बड़ी परेशानी..

rupee note

डेस्क : त्यौहारों के मौसम में कई घरेलू उपकरण, नए वाहन, बाइक और गैजेट्स खरीदने की प्लानिंग बहुत लोग करते हैं। ऐसा इसीलिए क्योंकि फेस्टिव सीजन में कई कंपनियां और ऑनलाइन रिटेलर्स ग्राहकों के लिए कई तरह के सेल ऑफर लेकर आते हैं। इन आकर्षण ऑफर में नो-कॉस्टइक्वेटेड मंथली किस्त (ईएमआई) योजनाएं भी शामिल रहती हैं।

मालूम हो नो-कॉस्ट ईएमआई ऑफर उसे कहते हैं जहां उपभोक्ताओं को अतिरिक्त ब्याज या शुल्क का भुगतान किए बिना किश्तों में विभिन्न उत्पाद खरीद सकते हैं। नए गैजेट या घरेलू उपकरण के मालिक होने के लिए कई लोगों द्वारा नो-कॉस्ट ईएमआई योजना का व्यापक रूप से लाभ उठा सकते हैं। पर कुछ भी खरीददारी करने के पहले आपको कई बातों के बारे में जरूर जान लें।

जब कभी भी आप कुछ खरीदने के लिए आप नो-कॉस्ट ईएमआई या जीरो-कॉस्ट ईएमआई का विकल्प चुनते हैं, तो आप उस प्रोडक्ट के लिए बिना किसी ब्याज या शुल्क के मासिक किस्त भरेंगे। यानी की आप बाद ईएमआई में विभाजित उत्पाद के असल दाम का भुगतान करेंगे। कई सारे बैंक अलग विकल्प में नो-कॉस्ट ईएमआई की सुविधा प्रदान करते हैं। वहीं, कुछ कर्जदाता कुछ उत्पादों पर शून्य-डाउन भुगतान की योजना भी देते हैं। जिसके तहत आपको किसी भी राशि का अग्रिम भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होती है और आसानी से मासिक किश्तें बना सकते हैं।

इसके अलावा कुछ बैंक डाउन पेमेंट के रूप में न्यूनतम राशि चार्ज करते हैं जिसके बाद बची हुई राशि को EMI के तरह विभाजित किया जाता है। पर ध्यान रहे कि नो-कॉस्ट EMI करते समय आप अपनी जरूरत के अनुसार अलग-अलग पुनर्भुगतान अवधि चुन सकते हैं। यह 3 महीने से लेकर 24 महीने तक कभी भी हो सकता है। अब अगर यह योजना आपकी अगली खरीदारी के लिए एकदम सही लगती है, तो कुछ चीजें हैं जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए। जबकि नो-कॉस्ट ईएमआई में मूल राशि पर कोई ब्याज नहीं लगता है। पर इसका अर्थ ये नहीं कि आपको केवल अपनी समान की वास्तविक कीमत का भुगतान करेंगे।

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इसके अलावा कई कर्जदाता प्रोसेसिंग शुल्क भी चार्ज करते हैं और इसे प्रोसेसिंग शुल्क कहा जाता है। यह बैंक को प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में ब्याज लेने की अनुमति देता है। इसके अलावा नो-कॉस्ट ईएमआई का विकल्प चुनते समय आपको उस उत्पाद पर दी जाने वाली छूट नहीं मिलती है, जिसका आप लाभ उठाना चाहते हैं। इसलिए इन कारकों का विश्लेषण करना और उसके बाद ही नो-कॉस्ट ईएमआई के लिए जाना बेहतर है। नो-कॉस्ट ईएमआई योजना का लाभ उठाने का निर्णय लेने से पहले नियम और शर्तों को पढ़ना हमेशा उचित रहता है।