चिराग से अलग पारस की लोजपा कितनी मजबूत ! पार्टी के भीतर अभी नहीं थमेगा सियासी भूचाल

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न्यूज डेस्क : लोक जनशक्ति पार्टी के संसदीय दल के नेता के रूप में हाजीपुर के सांसद और दिवंगत नेता रामविलास पासवान के छोटे भाई पशुपतिनाथ पारस भले ही संसदीय दल के नेता चुन लिए गए हो लेकिन एलजेपी के अंदर राजनीतिक द्वंद अभी कुछ दिनों तक और और चलने वाली है। बताते चलें कि विगत 5 दिनों के अंदर साधे गए सियासी समीकरण के बाद एलजेपी के भीतरखाने में तख्तापलट कर दिया गया।

जहां एलजेपी के संस्थापक सह पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान को साइड करके उनके छोटे भाई पशुपतिनाथ पारस ने लोजपा पर कब्जा जमाने की एक मजबूत कोशिश की है। बावजूद इसके पशुपतिनाथ पारस के लिए आगे की राह आसान नहीं होने वाली है। बताते चलें कि दिवंगत नेता रामविलास पासवान ने अपने सभी भाइयों को राजनीति में एक-एक करके सेट करने में कोई भी कसर नहीं छोड़ी। बावजूद इसके उनके जाने के साल भर नहीं हुए कि चाचा ने अपनी चाल से भतीजा को चित कर दिया । रामविलास पासवान केंद्र की राजनीति में लगातार मंत्री बने रहने के बाद अपने छोटे भाई पशुपतिनाथ पारस को भी कई दफे बिहार सरकार में मंत्री बनाया। साथ ही साथ छोटे भाई रामचंद्र पासवान को समस्तीपुर से लोजपा की टिकट पर लगातार सांसद बनते रहे ।

चिराग की पहल पर लोजपा एनडीए में हुई थी शामिल साल 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जब लोजपा एक बार फिर एनडीए गठबंधन में शामिल हुई थी । तो यह माना जा रहा था कि इसके सबसे बड़े सूत्रधार रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान हैं और वह सबसे कम उम्र के सांसद जमुई से चुने गए थे । जिससे कुछ दिनों के बाद रामविलास पासवान ने अपने पुत्र चिराग पासवान को लोक जनशक्ति पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया था ।

एएनआई के बिहार ब्यूरो चीफ मुकेश कुमार हालिया घटनाक्रम पर ट्वीट कर लिखते हैं कि कलयुग में राम जैसा भाई कोई था तो वो #रामविलास पासवान जो अपने भाइयों को बौआ बोलते थे अंतिम समय मे घर मे भाई और बेटा के बीच बन नही रहा था लेकिन रामविलास जी अंतिम दम तक भाइयो के तरफ थे।पासवान जी भाई भतीजा सबके लिए कुछ ना कुछ किये फिर कैसे एक भाई अपने ही भाई के सपनो में आग लगा दिया।

आगे उन्होंने इसी ट्वीट के प्रतिउतर में लिखा कि भाई ने कभी आपत्ति जताई नही थी। जब चिराग को अध्य्क्ष घोषित किया गया और मरते मरते हर पिता के तरह रामविलास पासवान भी अपने बेटा को सेट करना चाहते थे क्योंकि उन्हें शायद अपने भाइयों के बारे में पता होगा। भाई भतीजा सबके के लिए कुछ ना कुछ कुछ किये तो बेटा के लिये भी तो फ़र्ज़ बनता है।

लोजपा का कोर वोट बैंक किसके साथ ? बताते चलें कि रविवार देर रात जैसे ही यह खबर आई कि पशुपतिनाथ पारस ने चिराग पासवान को लोजपा से बेदखल करने की मजबूत और सफल कोशिश की है , तो पूरे बिहार में यह खबर सनसनी की तरह फैल गई । लोजपा के कोर वोटर माने जाने वाले पासवान समुदाय का जो वोट बैंक है। पूरे बिहार के अंदर उसमें यह खबर एक झटका से कम नहीं था। हाजीपुर के जो स्थानीय लोग हैं वह पशुपतिनाथ पारस से खासा नाराज दिख रहे हैं। चूंकि पशुपतिनाथ पारस यहां के स्थानीय सांसद हैं और जनता ने आरोप लगाया कि वह चुनाव जीतने के बाद कभी अपने संसदीय क्षेत्र में घूमने के लिए नहीं गए।

वहीं दूसरी तरफ मिथिला बेल्ट की बात कर लिया जाए मधुबनी, दरभंगा, बेगूसराय , खगड़िया जिला में तो इन सभी जगहों पर जो लोजपा का कोर बोर्ड बैंक है वह कहीं ना कहीं चिराग के पक्ष में मोबिलाइज है। तो इन सभी परिस्थितियों में यह माना जा सकता है कि लोजपा के अंदर पशुपतिनाथ पारस भले ही संसदीय दल के नेता चुन लिए गए हो और इस पर लोस स्पीकर ने मुहर लगा दी है। लेकिन आने वाले वक्त में पशुपतिनाथ पारस के लिए चिराग पासवान को लोजपा से बेदखल करना या उनके पावर को कम करना आसान नहीं होने वाला है। इन सभी चीजों के बीच जब मंगलवार को पशुपतिनाथ पारस केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक बुलाए हैं। तो यह देखना दिलचस्प होगा कि चिराग राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर बने रहते हैं या फिर कोई दूसरा नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में आगे आ सकता है ।

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