Begusarai News : काबर टाल क्षेत्र की जमीन को लेकर स्थानीय किसानों की परेशानियाँ आज भी कम नहीं हुई हैं। चार दशक से अधिक समय से विवाद और जलजमाव की समस्या से जूझ रहे ग्रामीण अब एक बार फिर आंदोलन के मूड में हैं। किसानों का कहना है कि अपनी ही जमीन पर खेती, बिक्री और उपयोग को लेकर वे वर्षों से सरकारी उदासीनता के शिकार हैं।
काबर टाल को 1984–86 और 1989 के बीच जिला व राज्य गजट में पक्षी अभयारण्य घोषित किए जाने के बाद से ही इस क्षेत्र के लोगों पर संकट और गहराता गया। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार और क्षेत्रीय नेताओं की लापरवाही ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। लगभग 40 वर्षों से उलझी समस्या को हल करने की दिशा में अब तक न तो ठोस प्रयास हुए और न ही जनप्रतिनिधियों ने कभी गंभीरता दिखाई।
रबी फसल पर गहरा संकट
इस वर्ष भी भारी बारिश ने काबर टाल क्षेत्र के किसानों की कमर तोड़ दी है। लगभग 25–30 हजार एकड़ भूमि जलप्लावित होने के कारण रबी सीजन में खेती शुरू नहीं हो पाई है। किसान महीनों से खेतों के सूखने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन नहरों में अवरोध और गेट बंद रहने के कारण पानी का निकास नहीं हो पा रहा है।
किसानों ने उम्मीद जताई थी कि नहर खोल दी जाएगी, जिससे जलनिकासी शुरू हो सकेगी। हालांकि, नहर तो खोली गई, परंतु बहाव मार्ग में रुकावट के कारण इसका लाभ नहीं मिल सका।
निकासी व्यवस्था का ऐतिहासिक आधार भी बेअसर : आजादी के बाद राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ने काबर से बगरस तक जलनिकासी सुनिश्चित करने के लिए लगभग 15 लाख रुपये की लागत से आठ किलोमीटर लंबी नहर और बगरस में सुलिस गेट का निर्माण कराया था। बरसात खत्म होते ही 15 अक्टूबर को गेट खोल दिए जाते थे, जिससे काबर का पानी बूढ़ी गंडक नदी में समा जाता था और किसान समय पर खेती कर पाते थे।
लेकिन इस वर्ष नवंबर बीतने को है, फिर भी सुलिस गेट नहीं खोला गया। किसानों के अनुसार, गेट बंद रहने से खेतों में जलजमाव बना हुआ है और रबी फसल की तैयारी पूरी तरह से ठप है।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से हस्तक्षेप की अपील : हाल ही में नहर गेट खोलने की कार्रवाई शुरू की गई, लेकिन जलनिकासी सुचारु नहीं हो पाई। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों महेश भारती, शंभुशरण शर्मा, शालिग्राम सिंह और मेनन कुमार ने जिला प्रशासन और जलनिस्सरण विभाग के सक्षम अधिकारियों से तत्काल सभी सुलिस गेट खोलने की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते जलजमाव दूर नहीं किया गया, तो हजारों किसान और मजदूर बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएंगे।

