मधुरापुर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के सभी ग्रामीणों के लिए राहत कैम्प व शौचालय की हो अविलंब व्यवस्था

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तेघड़ा प्रखण्ड अंतर्गत गुप्ता लखमीनियां बांध पर हो रहे रिसाव एवं बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से मिलने पहुंचे भाजपा नेता

न्यूज डेस्क : तेघड़ा प्रखण्ड अंतर्गत गंगा किनारे बसी बहुत बड़ी आबादी जो कृषि और पशुपालन कर गुजर बसर करती है।अभी कोरोना वायरस संक्रमण से उबर भी नहीं पाई थी। कि उनके सामने गंगा के एकाएक बढ़ते जलस्तर के कारण उत्पन्न बाढ़ की भयावह स्थिति किसी अकाल से कम नहीं है।तेघड़ा प्रखण्ड अंतर्गत निपनियां मधुरापुर पंचायत में गंगा के बढ़ते जल स्तर से पूरा इलाका बाढ़ के प्रकोप से जलमग्न है।इस क्षेत्र के लोगों के घरों में गंगा का पानी जा चुका है। घर के लोग अपने स्वजनों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने या घर के छतों पर रहने को विवश हैं।

इन लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या खाना और शौचालय की है।सोमवार की सुबह भाजपा नेता केशव शाण्डिल्य बाढ़ प्रभावित निपनियां मधुरापुर पंचायत के वार्ड  8,9,12,13,14 क्षेत्र के ग्रामीणों से मिलने अपने समर्थकों के साथ पहुंचे और बाढ़ प्रभावित समूचे क्षेत्र का दौरा किया।लोगों को होने वाली मूलभूत प्राथमिक समस्या के निदान के लिए उन्होंने तेघड़ा अवर अनुमंडल पदाधिकारी अविनाश कुणाल से बात कर इस क्षेत्र में तत्काल चार जगहों पर राहत खाना कैम्प,चिकित्सा कैम्प एवं चलंत शौचालय की व्यवस्था के साथ पशुपालकों के लिए प्लास्टिक की अविलंब व्यवस्था करवाई।वहीं इस विषम परिस्थिति में बाढ़ प्रभावित मधुरापुर पुवारी टोला के ग्रामीणों ने तत्काल मिलने वाली इस व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।साथ ही भाजपा नेता केशव शाण्डिल्य के पहल पर बरौनी एक पंचायत के वार्ड चार में गुप्ता लखमीनियां बांध से हो रहे रिसाव को बंद करने के लिए प्रखण्ड स्तर पर अवर अनुमंडल पदाधिकारी अविनाश कुणाल के नेतृत्व में युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है।

इस संबंध में एएसडीएम अविनाश कुणाल ने कहा कि आपदा के इस घड़ी में हर संबंध मदद के लिए जिला प्रशासन मुस्तैद है।वहीं ग्रामीणों ने कहा बाढ़ के प्रकोप में सबसे अधिक परेशानी महिलाओं,बच्चों और पशुओं को होती है।हम पुरुष तो किसी तरह अपना बचाव कर पाते है।वहीं भाजपा नेता केशव शाण्डिल्य ने जिलाधिकारी बेगूसराय एवं प्रखण्ड पदाधिकारी से मांग किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को फसल बीमा एवं आपदा राहत कोष से मिलने वाली हर संभव मदद दिया जाए।साथ ही पशुपालक किसान के लिए पशुचारे की भी व्यवस्था हो।

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