Begusarai News : बेगूसराय से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में भ्रष्टाचार का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ तकनीक (जियो-टैगिंग) और बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग कर एक गरीब बुजुर्ग महिला के हक पर डाका डाला गया। मामला बछवाड़ा प्रखंड के गोविंदपुर-3 पंचायत का है, जहाँ 90 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला चांदो देवी के नाम पर स्वीकृत आवास की राशि मुखिया के द्वारा अवैध तरीके से निकाल ली गई, जबकि धरातल पर ईंट तक नहीं रखी गई।
कैसे हुआ यह डिजिटल फ्रॉड?
जियो-टैगिंग में जालसाजी : PMAY-G पोर्टल पर आवास पूर्ण होने का प्रमाण देने के लिए असली लाभार्थी चांदो देवी के बजाय मुखिया शंकर साह ने अपनी माँ की फोटो अपलोड कर दी। जियो-टैगिंग में किसी अन्य स्थान के घर को दिखाकर सरकारी रिकॉर्ड में घर को पूर्ण घोषित कर दिया गया।

अवैध संयुक्त खाता (Joint Account) : लाभार्थी का पहले से यूको बैंक में व्यक्तिगत खाता होने के बावजूद, मुखिया ने बैंक कर्मियों के साथ मिलकर एक नया संयुक्त खाता (सं.- 15940110104385) खुलवाया। इसमें मुखिया की बेटी निक्की कुमारी को संयुक्त खाताधारक बनाया गया और बैंक में ऐसा बताया गया कि मुखिया की पुत्री निक्की लाभार्थी चांदो देवी की पोती है। जबकि, चांदो देवी का कोई बेटा ही नहीं है, केवल 4 बेटी हैं और योजना की ₹1,20,000 की राशि के साथ मनरेगा की मजदूरी भी डकार ली गई।

प्रशासनिक रिश्वतखोरी के आरोप : पीड़िता के नाती राजीव कुमार का आरोप है कि वार्ड कमिश्नर ने स्वयं स्वीकार किया है कि ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को 40 से 50 हजार रुपये की रिश्वत देकर फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार करवाई गई है। इसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सबूत के तौर पर मौजूद है।

सरकारी तंत्र की सुस्ती
जनवरी 2026 में RTI और CPGRAMS पर शिकायत के बाद, बिहार सरकार के संयुक्त सचिव रवि कुमार ने 10 मार्च 2026 को जिला पदाधिकारी को पत्र लिखकर 7 दिनों में जांच रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन आरोप है कि प्रखंड स्तर के अधिकारी उसी फर्जी रिपोर्ट को बार-बार ऊपर भेजकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहे हैं।
मेरा अपना कोई घर नहीं है, मैं अपने नाती के बनाए एक छोटे कमरे में रहती हूँ। मुखिया ने मुझे अनपढ़ जानकर धोखे से अंगूठा लगवाया और मेरी राशि निकाल ली। अधिकारी आते हैं और बिना मेरा घर देखे दफ्तर से ही रिपोर्ट लिख देते हैं।- चांदो देवी (पीड़िता)
जांच की मांग
पीड़ित परिवार ने अब जिला पदाधिकारी और निदेशक (DRDA) से मांग की है कि इस मामले की जांच स्थानीय प्रखंड कार्यालय के बजाय जिले की ‘विशेष भ्रष्टाचार निरोधक टीम’ (Vigilance Team) से कराई जाए और दोषी मुखिया, बैंक मैनेजर व आवास सहायक पर प्राथमिकी दर्ज हो।


