बेगूसराय में सदर सीट पर होगा महामुकाबला , इस सीट पर जिले का राजनीतिक भविष्य है निर्भर

Begusarai Seat

पोलिटिकल डेस्क : बेगूसराय जिले में कांग्रेस पार्टी को गठबंधन के तहत मिली एकमात्र बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र की सीट पर कंडीडेट सिटिंग विधायक अमिता भूषन हैं उनका मुख्य मुकाबला भाजपा से है। कांग्रेस पार्टी की यह सीटिंग सीट है और 2015 के चुनाव में गठबंधन के सहयोग से कांग्रेस की अमिता भूषण ने यह सीट जीती थी। उन्होंने भाजपा के तब के सीटिंग विधायक सुरेन्द्र मेहता को हराया था।

कांग्रेस ने उनपर फिर दांव लगाकर उन्हें फिर मैदान में उतारा है। भाजपा ने युवा कुंदन कुमार को उनके विरोध में उतारा है। इस बार जिले की इस सबसे महत्वपूर्ण सीट पर कांग्रेस और भाजपा दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। प्रतिष्ठा की इस सीट पर पूरे जिले के लोगों की नजर है। दोनों राष्ट्रीय दलों के उम्मीदवार के आमने-सामने होने और कब्जे को लेकर जोर आजमाइश से सीट चर्चित बनी है।

दोनों बड़े दलों के इस जोर आजमाइश में निर्दलीय, छोटे दल और भीतरघाती की भूमिका महत्वपूर्ण बनती जा रही है। अपने ही दल और गठबंधन से नाराज़ दल को छोड़कर विद्रोही उम्मीदवार बने दोनों दलीय उम्मीदवार के लिए चुनौती बने हैं। कई निर्दलीय जोर-शोर से प्रचार करने में लगे हैं। कुछ छोटी पार्टियों के उम्मीदवार भी इस लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने की लड़ाई में लगे हैं। आपको बता दे निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी सदर सीट पर गहमागहमी बढ़ा दी है संजय गौतम डॉ मीरा सिंह सहित कई निर्दलीय दिग्गजों ने अपनी सहभागिता से दलबदल वाले कैंडिडेट ओं के लिए खतरे की घंटी बजा दी है इस कड़ी में डॉक्टर मीणा सिंह ने बातचीत के दौरान बताया कि बेगूसराय में दल वाले कैंडिडेट से जनता ऊब चुकी है उसको ऐसा कैंडिडेट चाहिए चाहिए जो बेगूसराय सदर विधानसभा सीट के अंतर्गत मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी हुई जनता के संवेदना उसे जनता के जरूरत की चीजों में आमूलचूल परिवर्तन ला सके ऐसे प्रतिनिधि को इस बार बेगूसराय की जनता देगी और ऐसे तमाम प्रतिनिधियों को बहिष्कृत करेगी जो सिर्फ बाधा करने का काम करते हैं और जीतने के बाद 5 साल तक दर्शन नहीं देते हैं इस बार जनता हमको अपार समर्थन कर रही है।

लेकिन, क्षेत्र की बनावट और दोनों राष्ट्रीय पार्टी के धुंआधार प्रचार के सामने उनकी तैयारी कमजोर दिखती है। भाजपा कांग्रेस के आमने-सामने की लड़ाई में भीतरघात का खतरा दोनों तरफ है। भाजपा के इस सीट पर दर्जनभर दावेदार में अधिकांश नेतृत्व से नाराज़ हो चुनाव प्रचार से अलग हैं और भाजपा उम्मीदवार को कांटा रोपने में बाज नहीं आ रहे हैं‌‌ । कांग्रेस की भीतरघात की परंपरा पुरानी है। जिले में कांग्रेस को दूसरी सीट नहीं मिल पाने का गुस्सा जिले के इस सिंगल सीट पर ऐसे कांग्रेसी उतारने से बाज नहीं आएंगे। इसका खामियाजा कांग्रेस के उम्मीदवार को भुगतना पड़ेगा। कांग्रेस और भाजपा को इस सीट जीतने का जिले की राजनीति पर भविष्य की पकड़ को भी प्रकट करेगा।

भाजपा के उम्मीदवार कुन्दन कुमार और कांग्रेस के उम्मीदवार अमिता भूषण की छवि के बीच जनता को किसी एक को चुनना है। शहरी क्षेत्र के पढ़े-लिखे मतदाताओं और ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं पर भाजपा की पकड़ बड़ी है। जदयू और भाजपा का जातीय समीकरण भी उसके पक्ष में हैं। लोजपा भी भाजपा के साथ है। कांग्रेस वाम और राजद के महागठबंधन का जातीय समीकरण और सीटिंग विधायक का कार्य चुनावी हलचल में शामिल हैं। दोनों एक-दूसरे के समर्थक वोटर पर नजर गड़ाए है। बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र की जनता पर निर्भर करेगा कि वे किस राष्ट्रीय पार्टी को यहां से चाहते हैं।