विधानसभा में बोले लोजपा विधायक राजकुमार सिंह मटिहानी में डिग्री कॉलेज न होना दुर्भाग्यपूर्ण, खोले जाने की उठाई मांग

Rajkumar Singh MLA Maithani Begusarai

न्यूज डेस्क , बेगूसराय : गुरुवार को विधानसभा के बजट सत्र बेगूसराय के मटिहानी से जीते लोजपा के एकमात्र विधायक राजकुमार सिंह ने अपने सम्बोधन के दौरान कहा कि मेरा मानना है. कि यह बजट कोरोना महामारी से आहत बिहार की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम हो सकता है। हम सभी लोग यहां पर बिहार के महान जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए एकत्रित हुए और बिहार की जनता हम सभी लोगों की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है।

उनकी तमाम आशाएं अपेक्षाएं हमारे माध्यम से इस सदन के माध्यम से और सरकार के माध्यम से पल्लवित पुष्पित हो ना कि उनकी अपेक्षाएं हमारे आचरण से हमारे कार्यकलाप से उनकी आशाएं इसी सदन पर हमें लोगों के द्वारा उन्हीं प्रतिनिधियों के उन्हीं के द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से दम तोड़ दे । बजट में प्रावधान किए गए हैं उन प्रावधानों का समर्थन होना चाहिए मेरा मानना है कि निश्चित रूप से होना चाहिए ।

मटिहानी विधानसभा में डिग्री कॉलेज खोले जाने की उठाई मांग शिक्षा के क्षेत्र में मेरा मानना है कि शिक्षित बिहार से ही सुरक्षित बिहार की नींव रखा जा सकता है लेकिन इस मामले में एक बात में जरूर कहूंगा मैं जिस विधानसभा से आ रहा हूं वहां पर विगत 15 सालों से सत्ताधारी दल के प्रतिनिधि रहा लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि विधानसभा में 1 डिग्री कॉलेज की स्थापना नहीं हो पाई , सरकार सरकार इस ओर गंभीरता से ध्यान दें क्योंकि शिक्षा पर इस बार काफी जोर दिया गया है। मोबाइल क्लिनिक की व्यवस्था की जाए तो सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था से लोगों को अच्छी तरह से आच्छादित किया जा सकता है ।

बेगूसराय के दिवंगत सांसद ने संसद में बोले थे आज मटिहानी विधायक बोले … अंत में इतना कहूंगा कि हमारे आचरण इस प्रकार हो कि बिहार के महान जनता का लोकतंत्र में उनका आस्था मजबूत हो और यही उनकी अपेक्षा भी है हमारे तरफ से और सरकार की तरफ से है। ऐसी व्यवस्था होगी लोगों को निराश न होना पड़े और लोग यह ना कहें कि मकतल में आते हैं वह मंजर बदल-बदल कर या र ब कहां से लाऊं मैं सर बदल-बदल कर। बताते चलें कि इससे पहले कई साल पहले की बात है जब सांसद स्व भोला बाबू संसद भवन में बोले थे . मकतल में आते हैं खंजर बदल बदल कर …

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